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लापरवाही उजागर : हाईकोर्ट के विद्युत उपकेंद्र निर्माण में घटिया सामग्री लगाकर पांच अफसर फंसे, दो जेई सस्पेंड

Sun, 13 Nov 2022 05:18 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हाईकोर्ट को स्वतंत्र फीडर से निर्वाध विद्युत आपूर्ति के लिए अलग उपकेंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। पांच करोड़ रुपये की लागत से उपकेंद्र के भवन का निर्माण बीती जुलाई में पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड-एक की ओर से शुरू कराया गया था।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में 33/11 केवी क्षमता वाले विद्युत उप केंद्र के निर्माण में गड़बड़ी पीडब्ल्यूडी के कई अभियंताओं के गले की फांस बन सकती है। मानक के विपरीत काम, घटिया सामग्री के इस्तेमाल के साथ ही निर्माण की कछुआ चाल को लेकर कार्यदायी संस्था घिर गई है। इस मामले में पांच अभियंता फंस गए हैं। मुख्य अभियंता से स्पष्टीकरण तलब करने के साथ ही अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। जबकि, निलंबित किए गए दो अवर अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति किए जाने के संकेत मिले हैं।

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हाईकोर्ट को स्वतंत्र फीडर से निर्वाध विद्युत आपूर्ति के लिए अलग उपकेंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। पांच करोड़ रुपये की लागत से उपकेंद्र के भवन का निर्माण बीती जुलाई में पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड-एक की ओर से शुरू कराया गया था। 43 करोड़ रुपये की लागत से इस उपकेंद्र का निर्माण किया जाना है। इसमें विद्युत यांत्रिक खंड के तकनीकी कार्यों पर 38 करोड़ रुपये और सिविल के कार्यों पर पांच करोड़ रुपये की लागत निर्धारित है।

हालांकि सिविल कार्य यानी भवन निर्माण की बाद में डिजाइन भी बदली गई थी। इसलिए इसकी लागत बढ़ भी सकती है। लेकिन, इससे पहले इस उप केंद्र के भवन निर्माण में खेल उजागर होने के बाद कई अफसरों की मुसीबत बढ़ गई है। मानक के विपरीत काम कराए जाने की शिकायत मिलने पर शासन की ओर से जब जांच कराई गई, तब इसमें गड़बड़ियां पाई गईं। बालू के अलावा घटिया सामग्री का इस्तेमाल पाया गया है। काम में देरी होने पर विभागीय समन्वय बैठकों में भी पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अफसर अनुपस्थित रहे।
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शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट के मुताबिक अब तक छत की ढलाई हो जानी चाहिए थी, लेकिन सिर्फ पिलर ही खड़े किए जा सके हैं। इस मामले में पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-एक के दो अवर अभियंताओं को निलंबित किए जाने के साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करने के लिए कहा गया है। साथ ही अधिशासी अभियंता केके श्रीवास्तव और सहायक अभियंता संजीव सिंह की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। इनके अलावा इस पूरे मामले में मुख्य अभियंता केके पाहूजा से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।


अभी तक एक रुपये का भी भुगतान ठेकेदार को नहीं किया गया है। निर्माण संबंधी प्रगति की रिपोर्ट लगातार शासन को भेजी जा रही थी। जब तक बिलों का सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक भुगतान होने का सवाल ही नहीं है। रही बात घटिया सामग्री के इस्तेमाल की तो इसकी जांच कराई जा रही है। - केके श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड-एक पीडब्लयूडी।
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