हालांकि सिविल कार्य यानी भवन निर्माण की बाद में डिजाइन भी बदली गई थी। इसलिए इसकी लागत बढ़ भी सकती है। लेकिन, इससे पहले इस उप केंद्र के भवन निर्माण में खेल उजागर होने के बाद कई अफसरों की मुसीबत बढ़ गई है। मानक के विपरीत काम कराए जाने की शिकायत मिलने पर शासन की ओर से जब जांच कराई गई, तब इसमें गड़बड़ियां पाई गईं। बालू के अलावा घटिया सामग्री का इस्तेमाल पाया गया है। काम में देरी होने पर विभागीय समन्वय बैठकों में भी पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अफसर अनुपस्थित रहे।
शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट के मुताबिक अब तक छत की ढलाई हो जानी चाहिए थी, लेकिन सिर्फ पिलर ही खड़े किए जा सके हैं। इस मामले में पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-एक के दो अवर अभियंताओं को निलंबित किए जाने के साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करने के लिए कहा गया है। साथ ही अधिशासी अभियंता केके श्रीवास्तव और सहायक अभियंता संजीव सिंह की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। इनके अलावा इस पूरे मामले में मुख्य अभियंता केके पाहूजा से स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
अभी तक एक रुपये का भी भुगतान ठेकेदार को नहीं किया गया है। निर्माण संबंधी प्रगति की रिपोर्ट लगातार शासन को भेजी जा रही थी। जब तक बिलों का सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक भुगतान होने का सवाल ही नहीं है। रही बात घटिया सामग्री के इस्तेमाल की तो इसकी जांच कराई जा रही है। - केके श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड-एक पीडब्लयूडी।