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शव के साथ पांच दिन : अंधविश्वास में जकड़े परिवार ने पशुओं को भी चारा-पानी देना कर दिया था बंद

Thu, 30 Jun 2022 05:07 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

डीहा गांव निवासी अभयराज के पास दो भैंस, दो गायें व दो बछड़े थे। गांववाले बताते हैं कि मवेशी काफी अच्छी नस्ल के थे। लेकिन अंधविश्वास के फेर में घरवालों ने उन्हें भी चारा-पानी देना बंद कर दिया था।
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प्रयागराज में चौंकाने वाला मामला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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करछना थाना क्षेत्र के डीहा गांव में बेटी के शव के साथ घर के भीतर बंद मिले परिवार के लोग अंधविश्वास में इस कदर घिरे हुए थे कि वह पालतू जानवरों को भी चारा-पानी नहीं देते थे। उनके पास छह जानवर थे लेकिन खाना नहीं मिलने पर भूख से तड़पकर उन्होंने एक-एक कर दम तोड़ दिया था। ग्रामीण अगर जानवरों को कुछ खिलाने की कोशिश करते थे, तो परिवारवाले उनसे भी झगड़ पड़ते थे। उधर, पोस्टमार्टम के बाद युवती के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जबकि तीन बहनों को ससुराल भेज दिया गया।

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डीहा गांव निवासी अभयराज के पास दो भैंस, दो गायें व दो बछड़े थे। गांववाले बताते हैं कि मवेशी काफी अच्छी नस्ल के थे। लेकिन अंधविश्वास के फेर में घरवालों ने उन्हें भी चारा-पानी देना बंद कर दिया था। जानवरों की बिगड़ती हालत देख एक बार जिला पंचायत सदस्य विजयराज यादव ने चारा भेजवाया तो परिवार के सदस्यों ने उसे फेंक दिया था। ग्रामीणों के टोकने पर वह झगड़ा करने पर उतारू हो जाते और कहते कि देवी मां ही जानवरों को जिंदा रखेंगी। आखिरकार भूख से तड़प-तड़पकर एक-एक कर सभी जानवरों की मौत हो गई। हालत यह थी कि जानवरों की मौत के बाद परिवारवालों ने उनके शवों को भी हाथ नहीं लगाया। इसके बाद ग्रामीणों ने ही उन्हें दफनाया था। 

प्रयागराज में चौंकाने वाला मामला - फोटो : अमर उजाला
फेफड़ों में संक्रमण से गई जान
उधर मृतक अंतिमा के शव का पोस्टमार्टम बुधवार को हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी मौत फेफड़ों में संक्रमण की वजह से हुई। संक्रमण बढ़ने के कारण सड़न भी होने लगी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह ‘डेथ ड्यू टु सेप्टीसेमिक शॉक एंड इंफेक्शन इन लंग्स’ बताई गई है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जिसके बाद दारागंज में अंतिम संस्कार कर दिया गया। 

मौके पर जमा पुलिस और ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
लाई-चना खाकर रहते थे, मां-बाप को रखते थे कैद 

नैनी, करछना। क्षेत्र के डीहा गांव निवासी अभयराज यादव का पूरा परिवार अंधविश्वास के कुचक्र में ऐसा फंसा हुआ था कि बीते तीन माह से लाई-चना व गंगाजल ग्रहण कर जीवन बिता रहा था। लाई-चना भी दिन में केवल एक बार ही खाया करते थे। सुबह चार बजे अभयराज की बेटियां व बेटे गंगा घाट पर स्नान करने जाती थीं और वहीं बने चौरा देवी स्थान पर घंटों पूजा किया करते थे। यहां पर अभयराज की बेटियां गीत गाया करती थीं।


यह देखकर गांव वाले दहशत में रहते थे। पूरा परिवार गांव के किसी मंदिर में नहीं जाया करता था। अभयराज के घर पर उसकी बेटी बीनू की ही चला करती थी। बहनें व भाई उसका कहा मानते थे। पिता और मां जब विरोध करते तो उन्हें कमरे में बंद कर दिया जाता था। घटना के कुछ दिन पहले ही एक रिश्तेदार के घर पहुंचने पर उन्हें कमरे से बाहर निकाला गया था। बेटी की मौत के बाद जब अभयराज ने अंतिम संस्कार करने को कहा तो उसे फिर से कमरे में बंद कर दिया गया।

मौके पर जमा लोग - फोटो : अमर उजाला
मददगारों पर आक्रामक हो जाता था परिवार 
अभयराज के परिवार की मनोदशा देखकर यदि कोई ग्रामीण उनके मदद को तैयार होता था तो परिवार के सदस्य उस पर आक्रामक हो जाते थे। ऐसा कई बार हो चुका था। इसके कारण कोई भी कभी मदद के लिए नहीं जाता था। ग्रामीणों का कहना है कि यह परिवार गांव के संभ्रात व पढ़े लिखे परिवारों में था। उसके पांच लड़कियां व तीन लड़के पढ़ने में काफी होशियार थे। पिता नैनी स्थित एक विवि में कार्यरत था और पारिवारिक वजहों से परेशान होकर उसने नौकरी छोड़ दी थी। गांव में ही उनके पास आठ बीघा खेत था।


गांववाले बताते है कि कुछ साल पहले अभयराज का परिवार इस तरह नहीं था। लेकिन चौथी बेटी बीनू की शादी के बाद से ही उनके परिवार में अचानक बदलवा आ गया और धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया। बीते दो ढाई साल से परिवार झाड़फूंक के फेर में जकड़ गया और हर समस्या का समाधान उसे इसी में नजर आने लगा। इसी के साथ वह रिश्तेदारों से भी मतलब खत्म कर दिया था। न किसी के यहां जाते थे और यदि कोई रिश्तेदार इनके घर आ जाए तो उसे भगा दिया करते थे। 

करछना। डीहा गांव में घर के अंदर लाश की सूचना पर पहुंची पुलिस व जुटी ग्रामीणों की भीड़ - फोटो : prayagraj
तीसरे नंबर की बेटी का घर में नहीं था आना जाना 
अभयराज की तीसरे नंबर की बेटी रेनू पत्नी पवन शादी के कुछ दिनों बाद तक अपने मायके आया करती थी। लेकिन बीते तीन सालों में परिवार में हो रहे अंधविश्वास के खेल को देखकर उसने अपने मायके में आना छोड़ दिया था। रेेनू की शादी नैनी में हुई थी। वह न तो अपने मायके आया करती थी और न ही परिवार के सदस्यों से मतलब रखती थी। 

प्रयागराज में चौंकाने वाला मामला - फोटो : अमर उजाला
बड़ी बेटी व उसके बच्चों को परिवार ने पहुंचा दिया ससुराल 
भयराज की बड़ी बेटी मीरा की शादी मेजा थाना क्षेत्र के गुनई गांव में 12 साल पहले हुई थी। वह अपने मायके अभी एक माह पहले बच्चों को लेकर आई थी और उसका भी इस झांड फूंक में काफी विश्वास रहा करता था। मीरा का पति सुनील भी अक्सर यहां रहा करता था और अपनी पत्नी व साले-सालियों के अंधविश्वास में उनका सहयोग किया करता था। गांव वालों ने बताया कि सुनील मंगलवार की सुबह ही अपने घर गया था। मीरा के दो बेटी प्रीति व कीर्ति व एक बेटा प्रतीक है।


भोजन न मिलने के कारण तीनों बच्चें भी कुपोषण का शिकार हो गए थे। कीर्ति की हालत तो काफी गंभीर थी और उसे पास स्थित अस्पताल में पुलिस वालों ने भर्ती कराया था। बुधवार को हालत में सुधार होने पर अभयराज के भाई के लड़कों ने मीरा व उसके बच्चों को उनकी ससुराल पहुंचा दिया। दूसरी बेटी रेखा की भी शादी मेजा थाना क्षेत्र के भुस्का गांव में हुई थी। उसके एक बेटा अर्पित व एक बेटी अर्पिता है। बीते रविवार को वह भी अपने बच्चों के साथ यहां आई थी।

प्रयागराज में चौंकाने वाला मामला - फोटो : अमर उजाला
बीनू की शादी के बाद से ही बदली घर की स्थिति 
अभयराज की चौथी बेटी बीनू की शादी तीन साल पहले मेजा थाना क्षेत्र के भुस्का गांव में रिंकू यादव से हुई थी। रिंकू अभयराज की दूसरी बेटी रेखा का देवर है। शादी के दिन भी बीनू ने काफी हंगामा किया था। लेकिन घरवारों व रिश्तेदारों ने किसी तरह समझा बुझाकर शादी करा दी थी। वह अपने ससुराल में दस दिन थी और वहां के लोगों को भी काफी परेशान कर दिया था। जिसके बाद उसके ससुराल वाले उसे मायके छोड़कर चले गए थे। इसके बाद वह भी अपनी ससुराल नहीं गई। उसका पति रिंकू अक्सर यहां आया करता था।

Prayagraj News : डीहा गांव में अभयराज यादव का मकान। - फोटो : अमर उजाला।
दरवाजे नहीं, खिड़की से आते-जाते थे घरवाले 
अभयराज के घरवाले इतने अंधविश्वासी थे कि बीते तीन माह से घर के मुख्य द्वारा पर ताला बंद कर रखा था और बगल लगी खिड़की को निकालकर उसकी से आया जाता करते थे। तीनों लड़के बाजार कभी-कभार जाते थे और वहां से केवल लाई चना इकट्ठा खरीदकर ले आया करते थे। बाजार में भी वह किसी दुकानदार से कोई मतलब नहीं रखा करते थे। 

Prayagraj News : अभयराज यादव की नतिनी कृति। - फोटो : अमर उजाला।
अभयराज अपनी पत्नी के साथ चला गया ससुराल 
पुलिस के मुताबिक, अभयराज ने बताया कि बेटे व बेटियां उसकी बात नहीं मानते थे और उसे व उसकी पत्नी विमला देवी को कमरे में बंधक बनाकर रखा जाता था। मंगलवार शाम को तो दोनों पास रहने वाले अपने पट्टीदार के घर चले गए थे। लेकिन देर रात अमहा देहली स्थित ससुराल से उसके उसके साले साले जमुना, केशव व उमाशंकर आए और इन्हें लेकर अपने साथ चले गए। 

Prayagraj News : डीहा गांव में ग्रामीणों से बातचीत करतीं उप जिलाधिकारी। - फोटो : अमर उजाला।
कोटे की दुकान से दो माह से नहीं उठाया था राशन
कोटेदार जगदीश ने बताया कि बीते दो माह से उन्होंने राशन नहीं उठाया था। जब उनके घर में संदेशा लेकर जाता था तो वह हमलावर हो जाते और कहते जब देवी जी कहेंगी तब वह राशन लेने आएंगे। बताया कि बीते ढाई साल से परिवार के सदस्यों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। पुलिस जब अभयराज के घर के अंदर दाखिल हुई तो देखा के आंगन में 20 बोरी अनाज है। इसमें गेहूं व चावल रखा हुआ है। पर्याप्त राशन होने के बाद भी घर में बीते दो माह से चूल्हा नहीं जला था। 

Prayagraj News : डीहा गांव में जुटी ग्रामीणों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला।
सभी बच्चे थे पढ़ लिखे 
अभयराज का बड़ा बेटा आर्यन स्नातक कर नोएडा में काम करता था। कोरोना संक्रमण के दौरान वह गांव आ गया और फिर अपनी बहनों के साथ ही झाड़फूंक में लग गया। दूसरे नंबर का बेटा मान सिंह एमएसएसी करके बीटीसी कर रहा था। वहीं तीसरा बेटा ज्ञान सिंह आईटीआई कर चुका था। मृतका अंतिमा इंटर की छात्रा थी। बाकी चारों बहनें स्नातक कर चुकी थी। 
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मौके पर जमा लोग - फोटो : अमर उजाला
रिश्तेदारों से नहीं था कोई नाता
गांव में अभयराज के भाई नेब्बू लाल का पूरा परिवार रहता है। नेब्बू लाल के लड़के शमशेर बहादुर, अवधेश, राम सिंह अपने परिवार के साथ यहीं पास में ही रहा करते हैं। उन्होंने बताया कि अभयराज का परिवार बीते एक साल से किसी से कोई मतलब नहीं रखता था। गांव में ही उनका चचेर भाई राज नारायण व उनके बेटे आशीष और अजय भी रहते है। लेकिन अभयराज के परिवार से इनका कोई लेनादेना नहीं है।
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