घटना के बाद एक आरोपी ने अतर सिंह की बंदूक और कारतूस की पेटी उठा ले गया। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने दो नवंबर 1982 को सभी आरोपियों को डकैती सहित हत्या का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई थी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अपील अब केवल आरोपी सत्तू के संबंध में विचाराधीन थी। अन्य अपीलकर्ताओं की मृत्यु होने से उनकी अपील समाप्त हो चुकी थी।
हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अभियोजन की कहानी से स्पष्ट है कि दोनों पक्षों की मुलाकात अचानक हुई थी और फायरिंग पुरानी दुश्मनी के कारण शुरू हुई। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं था, जिससे यह साबित हो कि आरोपियों का पहला इरादा डकैती करना था। इस मामले में डकैती का इरादा साबित नहीं हो सका। इसलिए हाईकोर्ट ने सत्तू को सभी आरोपों से बरी कर दिया।