फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फिराक की जयंती पर विशेष : फिराक पर कैसे फख्र करेंगी आने वाली नस्लें, अपने ही विवि में नहीं लग सकी प्रतिमा

Sun, 28 Aug 2022 08:17 AM IST
विनोद सिंह अनिल सिद्धार्थ, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अप्रैल 1981 में मशहूर शायर फैज अहमद फैज के सम्मान में महादेवी वर्मा की अध्यक्षता में एक जलसा हुआ था, जिसमें फिराक के साथ उपेंद्र नाथ अश्क भी शामिल थे। मंच पर पहुंचने के बाद सियासत और अदब के गहरे रिश्तों को रेखांकित करते हुए फैज ने दुनिया के लिए इश्क का पैगाम दिया।
विज्ञापन
Prayagraj News : फिराक गोरखपुरी। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मशहूर शायर रघुपति सहाय ‘फिराक गोरखपुरी’ बेमिसाल शख्सियत के मालिक थे। उन्होंने शायरी से समाज को दुरुस्त करने में पूरी उम्र गुजार दी। कलमकार होने के साथ ही डिप्टी कलक्टरी का पद छोड़कर वह जंगे आज़ादी में भी शरीक हुए और अंग्रेजों के खिलाफ लिखते हुए नेहरू के साथ खड़े रहे।

विज्ञापन



इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अप्रैल 1981 में मशहूर शायर फैज अहमद फैज के सम्मान में महादेवी वर्मा की अध्यक्षता में एक जलसा हुआ था, जिसमें फिराक के साथ उपेंद्र नाथ अश्क भी शामिल थे। मंच पर पहुंचने के बाद सियासत और अदब के गहरे रिश्तों को रेखांकित करते हुए फैज ने दुनिया के लिए इश्क का पैगाम दिया।

फिराक अस्वस्थ थे और उन्हें गोद में उठाकर मंच तक  लाया गया था लेकिन फैज के संबोधन के बाद फिराक कहां चुप बैठने वाले थे। बोल पड़े, ‘आने वाली नस्लें तुम पर फख्र करेंगी हमअसरो/जब उनको यह ध्यान आएगा तुमने फिराक को देखा है।’ हालांकि तकरीबन साल भर बाद ही वह अदब को अनूठी विरासत देकर इस फानी दुनिया से कूच कर गए। लेकिन, आने वाली नस्लें फिराक पर कैसे फख्र कर सकेंगी, हमने उनकी विरासत को सहेज कर रखा ही नहीं। उनके बैंक रोड स्थित बंगले की सूरत तो बदल ही गई है, उनकी तमाम चीजें विश्वविद्यालय या किसी साहित्यिक संस्थान के पास भी नहीं हैं।
विज्ञापन

और तो और उनके अपने ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उनकी एक प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव आज तक अधूरा ही रह गया है। अरसा पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक समिति की ओर से प्रेमचंद और फिराक की प्रतिमाएं लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। परिसर में प्रेमचंद की प्रतिमा तो लग गई लेकिन उर्दू या अंग्रेजी विभाग के सामने के सवाल पर फिराक की प्रतिमा लगाने का मामला टल गया। समिति और दृश्य कला विभाग के अध्यक्ष प्रो.अजय जैतली कहते हैं, प्रस्ताव के बाद मूर्ति कला विभाग के विद्यार्थियों ने फिराक की प्रतिमा बनाने की शुरुआत की थी लेकिन किन्हीं वजहों से यह काम आगे नहीं बढ़ सका। जल्द ही इस बारे में नए सिरे से पहल की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें