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फिराक जयंतीः राष्ट्र की अपेक्षा देश की अवधारणा अधिक व्यापक

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Firaq Gorakhpuri - फोटो : CITY DESK
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हिंदुस्तानियत और इसके बनने की प्रक्रिया’ विषयक संवाद में बोले प्रो.अपूर्वानंद
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जोश ऐंड फिराक लिटरेरी सोसाइटी की ओर से जयंती पर याद किए गए फिराक गोरखपुरी
प्रयागराज। जाने-माने विचारक और दिल्ली विश्वविद्यालय मे हिंदी के प्रो.डॉ. अपूर्वानंद का कहना है कि राष्ट्र की अपेक्षा देस की अवधारणा अधिक व्यापक है। फिराक गोरखपुरी की जयंती पर जोश ऐंड फिराक लिटरेरी सोसाइटी की ओर से ‘हिंदुस्तानियत और इसके बनने की प्रक्रिया’ विषयक संवाद में बतौर मुख्य वक्ता उन्होंने कहा कि आज देस का विचार, राष्ट्र की अपेक्षा स्थानीयता का अच्छी तरह बोध कराता है। इससे भारत की जातीय और सांस्कृतिक बहुलता की बेहतरीन अभिव्यक्ति हो सकती है।
प्रो.अपूर्वानंद ने कहा कि आज चुन-चुन कर तथा जानबूझकर भारत की मिलीजुली संस्कृति को लक्ष्य करके मुसलमानों तथा ईसाइयों पर हमले किए जा रहे हैं। जिस आज़ादी के लिए हिंदुओं तथा मुसलमानों ने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी और साझी विरासत की मिसाल पेश की थी, मौजूदा सरकार उसे सुनियोजित तरीके से खत्म करने की कोशिश कर रही है। वर्तमान में असम और कश्मीर के घटनाक्रम साबित करते हैं कि आरएसएस तथा भाजपा ने बड़े पैमाने पर ऐसी योजना बना ली है कि देश में वैसा ही माहौल पैदा किया जाए, जैसा आजादी के पहले सांप्रदायिकता का रूप लिए हुए था, जिससे देश का बंटवारा हुआ। ऐसे में महात्मा गांधी की शहादत को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर सांप्रदायिकता के विरुद्ध मजबूत लड़ाई लड़ने की जरूरत है।
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व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर का सत्र भी चला, जिसमें रचनाकारों, बुद्धिजीवियों की ओर से उठाए गए सवालों का उन्होंने साफगोई से जवाब दिया। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो.आलोक राय ने कहा, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाले देश में फिर सांप्रदायिकता का उफान चिंताजनक है। प्रो.अली अहमद फातिमी ने फिराक को याद करते हुए उन्हें भारत की साझी विरासत का प्रतिनिधि बताया। इस दौरान सोसाइटी के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता उमेश नारायण शर्मा के असामयिक निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उनके सामाजिक. सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित किया गया।
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स्वराज विद्यापीठ सभागार में हुए संवाद का संयोजन अविनाश कुमार मिश्र, संचालन अंशु मालवीय तथा आभार ज्ञापन प्रो.अली अहमद फातमी ने किया। संवाद में प्रो.मानस मुकुल दास, प्रो.अनिता गोपेश, रवि किरण जैन, सुधांशु मालवीय, आनंद मालवीय, हरिश्चंद्र द्विवेदी, जफर बख्त, शुभी, प्रो.कृष्ण स्वरूप आनंदी, मनोज त्यागी, रामप्यारे राय, अनिल रंजन भौमिक, फखरुल करीम सिद्दीकी, प्रकर्ष मालवीय, शुभदर्शन मालवीय, रामाज्ञा राय, नसीम अंसारी आदि मौजूद थे।
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