गोरखपुर सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य प्रोफेसर एस. डोमिनिक राजकुमार ने कैंट थाने में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया लखनऊ डायसिस के बिशप मॉरिस एडगर दान समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
गोरखपुर सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य प्रोफेसर एस. डोमिनिक राजकुमार ने कैंट थाने में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया लखनऊ डायसिस के बिशप मॉरिस एडगर दान समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद फर्जी नियुक्ति पत्र और सर्कुलर तैयार कर दूसरे व्यक्ति को कार्यवाहक प्राचार्य बनाने की कोशिश की गई। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई की है।
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एफआईआर के मुताबिक, प्रो. एस. डोमिनिक राजकुमार ने बताया कि कॉलेज का संचालन सेंट एंड्रयूज कॉलेज एसोसिएशन सोसाइटी के माध्यम से होता है। सोसाइटी की नियमावली में प्रबंध समिति को प्राचार्य की नियुक्ति, निलंबन और बर्खास्तगी का अधिकार दिया गया है। इसी प्रबंध समिति को लेकर हाईकोर्ट में विवाद चल रहा है। शिकायत में कहा गया कि गोरखपुर मंडल सोसाइटीज एवं चिट्स फर्म्स सहायक रजिस्ट्रार ने सात मार्च को पत्र जारी किया था। इसमें हाईकोर्ट का फैसला आने तक प्रबंध समिति की बैठक कर कोई बदलाव नहीं करने का निर्देश दिया गया था।
आरोप है कि चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के मॉडरेटर मोस्ट रेवरेंट परितोष कैनिंग की कथित सह पर बिशप मॉरिस एडगर दान, रेव. रोशन लाल और रैना सैमुअल समेत अन्य लोगों ने मिलकर फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। इसमें रैना निवेदिता सैमुअल को कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त करने की बात कही गई। इसके साथ ही एक कथित सर्कुलर भी तैयार कराया गया। इसमें प्रबंध समिति के कुछ सदस्यों से इस पर हस्ताक्षर कराए गए।
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आरोप है कि अशोक नगर स्थित एक साइबर कैफे में इंटरनेट की मदद से कुछ दस्तावेज तैयार किए गए। एसीपी सिविल लाइंस ने बताया कि शिकायतकर्ता ने फर्जीवाड़ा और जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करने समेत अन्य आरोप लगाया है। न्यायालय के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आरोप पूरी तरह बेबुनियाद : एडगर दान
बिशप मॉरिस एडगर दान ने आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर जारी किया गया पत्र पूरी तरह सही है। पत्र पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति के भी हस्ताक्षर हैं। मामले की निष्पक्ष और सही तरीके से जांच होने पर पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।