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महंत की मौत में चार दिन बाद भी एफआईआर नहीं

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दारागंज स्थित पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव महंत आशीष गिरि (फाइल)। - फोटो : CITY DESK
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पुलिस ने जीडी में सूचना दर्ज कर कराया पोस्टमार्टम
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मोबाइल का पैटर्न लॉक भी नहीं खोल पाए एक्सपर्ट
प्रयागराज। निरंजनी अखाड़े के महंत आशीष गिरि की मौत का रहस्य आज भी रहस्य बना रहा। इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना को चार दिन बीतने के बाद भी अभी तक न खुदकुशी की एफआईआर दर्ज की गई और न ही हत्या की। पुलिस ने सिर्फ जीडी पर सूचना दर्ज कर पोस्टमार्टम करा दिया। एफआईआर न होने के कारण अभी तक इस मामले में कोई जांच अधिकारी भी नियुक्त नहीं हो सका। पुलिस का कहना है कि किसी ने तहरीर ही नहीं दी है। अखाड़े से जुड़े संतों से पूछताछ जरूर हुई लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला।
मूल रूप से पिथौरागढ़ के रहने वाले महंत आशीष गिरि की 17 नवंबर की सुबह संदिग्ध हाल में गोली लगने से मौत हो गई थी। वह अखाड़े के आश्रम में बने कमरे के बिस्तर पर मृत पड़े मिले थे। हथेली में फंसी पिस्टल व मौके से बरामद खोखे के आधार पर पुलिस ने इसे खुदकुशी बताया। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि समेत अन्य साधु संत भी यही कहते रहे कि आशीष गिरि ने शराब पीने की बात सामने आने पर आत्मग्लानि में यह कदम उठाया। पुलिस की भूमिका इसके बाद ही शुरू होनी थी लेकिन, एफआईआर ही नहीं दर्ज की गई। पुलिस गोली से मौत के मामले में अमूमन एफआईआर जरूर दर्ज करती है ताकि जांच हो सके लेकिन, इस मामले में पुलिस चार दिन बाद भी तहरीर का इंतजार कर रही है। कुछ साधु संतों की ओर से अखाड़े और संपत्ति के विवाद की बात बताई गई लेकिन, पुलिस ने भी उस मामले में अभी तक कोई जांच शुरू नहीं की।
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एसओ दारागंज आशुतोष तिवारी का कहना है कि अखाड़े से जुड़े कई साधु संतों से पूछताछ हुई है लेकिन सबने वही शराब वाली बात बताई। और कोई विवाद महंत का सामने नहीं आया है। मोबाइल का पैटर्न लाक खुलवाने के लिए एक्सपर्ट को बुलाया गया था लेकिन वे भी लॉक नहीं खोल पाए।
बेहद करीब से चली थी गोली
महंत आशीष गिरि की मौत के मामले फोरेंसिक एक्सपर्ट ने का कहना है कि मामला खुदकुशी का है। उनका कहना है कि पास से गोली चलने पर गोली के स्पाट के आस पास ब्लैकनिंग (काला घेरा) हो जाती है। जो अमूमन खुदकुशी के ही मामले में होता है। दूसरे खोखे की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि वह दराज में था।
मोबाइल से खुल सकते हैं कई राज
महंत आशीष गिरि के मोबाइल से कई राज खुल सकते हैं। मसलन वह इन दिनों किससे ज्यादा बात कर रहे थे। अंतिम काल किसकी थी। हो सकता है कि अंतिम कॉल करने वाले को कुछ उन्होंने बताया हो। पुलिस का कहना है कि उनके घर वाले आए थे लेकिन उन्होंने भी कोई आरोप नहीं लगाया है।
महंत आशीष गिरि की मौत पर सीबीआई जांच की मांग तेज
-परी अखाड़ा की पीठाधीश्वर त्रिकाल भवंता और वकीलों ने कहा, पुलिस दोषियों को बचाने का काम कर रही
-मुख्यमंत्री को लिखी गई चिट्ठी, अखाड़े के प्रभावशाली लोगों पर जताया शक
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प्रयागराज। निरंजनी अखाड़े के सचिव आशीष गिरि की रहस्यमय हालत में मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई है। आचार्य कुशमुनि के बाद अब परी अखाड़े की पीठाधीश्वर त्रिकाल भवंता और वकीलों ने भी सीबीआई जांच की मांग की है। पुलिस जिस तरह जांच कर रही है, उससे साफ है कि वह दोषियों को बचाने का काम कर रही है। चार दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। त्रिकाल भवंता ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी है।
परी अखाड़ा पीठाधीश्वर त्रिकाल भवंता ने बयान जारी कर कहा है कि पुलिस ने शुरूआत से ही जांच के नाम पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। न तो पुलिस अब तक उनका मोबाइल खोल पाई है न ही यह साफ कर पाई है कि यह आत्महत्या का मामला है या फिर हत्या का। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखा है कि स्थानीय पुलिस कभी भी सच्चाई सामने नहीं ला सकती है। मामला साफ साफ हत्या का है। इस मामले में अखाड़े के ही प्रभावशाली लोगों का हाथ हो सकता है। अखाड़े के संपत्ति विवाद की भी जांच होनी चाहिए। स्थानीय पुलिस अधिकारियों को इस मामले से दूर रखा जाय नहीं तो वे भी जांच प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने सीबीआई जांच की उनकी मांग नहीं मानी तो कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगी।
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दूसरी ओर उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं की बैठक में महंत आशीष गिरि की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग की गई। अधिवक्ता अशोक कुमार उपाध्याय और रजनीकांत राय आदि ने बताया कि इतने गंभीर मामले में अभी तक एफआईआर नहीं दर्ज हुई है। बैठक में निर्णय लिया गया है कि पांच सदस्यीय अधिवक्ताओं की टीम एफआईआर दर्ज करवाने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस की हीलाहवाली देखते हुए सीबीआई ही इस मामले की जांच कर सकती है। बैठक में राकेश उपाध्याय, अजीत मणि त्रिपाठी, चंद्रसेन पाल, जीतेंद्र पांडेय, राजकुमार शुक्ला और शशिकांत आदि मौजूद थे।
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