प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा को 3.38 बजे संबोधित करना शुरू किया और 4.29 बजे उनका भाषण समाप्त हुआ। 51 मनट के संबोधन में उन्होंने हर वर्ग को साधने की कोशिश की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की बात की। महिलाओं और किसानों पर भी बोले, लेकिन कुछ विवादित मुद्दों पर कुछ नहीं कहा। अपने पूरे भाषण में बसपा का तो नाम लिया, लेकिन मायावती पर सीधे वार करने से बचते रहे। उनके निशाने पर सिर्फ सपा और कांग्रेस के नेता रहे।
पीएम ने बच्चों की पढ़ाई, युवाओं को कमाई और बुजुर्गों को दवाई की बात कही। यह भी बताया कि उन्होंने 700 दवाओं के दाम 80 फीसदी तक कम करा दिए। हृदय रोगियों के लिए स्टंट के दाम कम कराए। रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए। बताया कि यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता उन्हीं की देन है और उन्हीं ने नीम कोटिंग के जरिये यूरिया की कालाबाजारी बंद कराई। चूल्हे में भोजन पकाने वाली महिलाएं दमे का शिकार न हों और न ही बच्चे बीमार पड़ें, इसके लिए 1.80 करोड़ परिवारों को सिलेंडर और मुफ्त गैस कनेक्शन दिए। इनमें अकेले 55 लाख कनेक्शन यूपी में दिए।
वहीं, महिलाओं को खुले में शौच न जाना पड़े, इसके लिए देश भर में चार करोड़ से अधिक शौचालय बनवाए। हालांकि, ये सभी बातें उन्होंने पूर्व की जनसभाओं की तरह यहां भी सिर्फ दोहराईं, लेकिन कुछ विवादित मुद्दों पर दोबारा बोलने से बचे। इस बार यूपी का गोद लिया बेटा नहीं, बल्कि यूपी का सांसद बनकर वोट मांगे। कब्रिस्तान और श्मशान की बात नहीं दोहराई और न ही दो घंटे पहले बुंदेलखंड में हुई चुनावी जनसभा की तरह यहां मायावती पर सीधा हमला किया।
इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में इलाहाबाद से जुड़े मुद्दे गायब रहे। उन्होंने यह तो कहा कि गंगा तट पर खड़े हैं और यूपी के विकास के लिए उन्हें यहां के लोगों का सहयोग चाहिए, लेकिन गंगा के मुद्दे पर कुछ नहीं कहा। पिछले भाषणों में उन्होंने भर्तियों में घोटालों की बात की थी, लेकिन इलाहाबाद में कई भर्ती आयोगों के मुख्यालय होने के बावजूद यहां इस मसले पर कुछ नहीं कहा।