कुंडा प्रतापगढ़ जहरीली शराब कांड के बाद से निलंबित चल रहे आबकारी इंस्पेक्टर शंकरलाल ने सामाजिक, आर्थिक व मानसिक पीड़ा से तंग आकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। उनका कहना है कि एक दिसंबर 2021 को जांच पूरी होने के बाद भी उन्हें नौकरी पर बहाल नहीं किया गया, जिसके कारण वह काफी परेशान हैं। वह और उनका परिवार तमाम प्रकार की यातनाएं झेलने को मजबूर हो रहा है।
बता दें कि 15 मार्च 2021 को कुंडा में चार लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। इस मामले में जिला आबकारी अधिकारी राजेश, इंस्पेक्टर शंकरलाल और सिपाही राम भजन को निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा इन्हें प्रयागराज मुख्यालय से संबद्ध करते हुए जांच बैठा दी गई थी। एक दिसंबर 2021 को जांच पूरी हो गई। नियमानुसार जांच के बाद आरोप पत्र के आधार पर कार्रवाई कर वापस नियुक्ति कराई जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
इसके बाद आबकारी इंस्पेक्टर शंकरलाल ने आबकारी आयुक्त, प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को कई पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। निलंबित चल रहे इंस्पेक्टर शंकरलाल का कहना है कि उनके चार बेटे हैं, जिसमें तीन बेरोजगार हैं। इसके कारण परिवार की जिम्मेदारी भी उनके कंधे पर है। दो साल से अधिक समय से वह निलंबित चल रहे हैं और अब उनकी छह साल की नौकरी शेष बची है।