आटे की कमी से निजात की कवायद तेज कर दी गई है। एफसीआई पहले चरण में फ्लोर मिलों को 10 हजार क्विंटल गेहूं उपलब्ध कराएगा। आपूर्ति शनिवार से ही शुरू होने के दावे किए जा रहे हैं। दो-तीन दिनों में मिलों से आटा बाजार में आ जाएगा। हालांकि, लोगों को इसकी प्रति किग्रा तीन से चार रुपये अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
फ्लोर मिलों में गेहूं खत्म हो गया है। इससे बाजार में आटे का घोर संकट खड़ा हो गया है। अमर उजाला के शनिवार के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। फ्लोर मिल वाले किसानों तथा व्यापारियों से गेहूं लेते रहे हैं, लेकिन खराब मौसम तथा लॉकडाउन की वजह से गेहूं की आपूर्ति बंद हो गई है। इन परेशानियों को देखते हुए डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय हुआ कि एफसीआई 10 हजार क्विंटल गेहूं उपलब्ध कराएगा। पहले एफसीआई की ओर से 2700 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं आपूर्ति की जा रही थी। हालांकि, गेहूं की कीमत 2340 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है। फ्लोर मिल संचालकों का कहना है कि यह कीमत भी अधिक है। उनका कहना है कि पिसाई, ढुलाई, चोकर आदि पर प्रति क्रिग्रा चार से पांच रुपये खर्च आएगा। मिल मालिक आशीष केसरवानी का कहना है कि अब मिलों से गेहूं की आपूर्ति 2800 रुपये क्विंटल की दर से हो पाएगी। जबकि, अभी तक 2500 रुपये प्रति क्विंटल आटे की बिक्री की जाती थी। चूंकि, बीच में आढ़तियों और फुटकर विक्रेता भी होंगे। ऐसे में ग्राहक को आटा और महंगा मिलेगी।