उधर, पिंकल घर पहुंची तो कमरे का दरवाजा भीतर से बंद था। बाहर खड़ी होकर वह रात भर आवाज देती रही लेकिन, उसने दरवाजा नहीं खोला। सुबह तक उसके बाहर नहीं आने पर पिंकल ने जानकारी दी तो आसपास के लोग जुट गए। कई बार आवाज लगाने पर भी जवाब नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने भी आवाज लगाई लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ। दरवाजा तोड़कर पुलिसकर्मी कमरे के भीतर दाखिल हुए तो वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। पिंकल की खून से लथपथ लाश फर्श पर पड़ी थी। गला रेतकर उसकी हत्या की गई थी। जबकि पास में ही राजेंद्र भी लहूलुहान पड़ा था। उसके पेट में चाकू से वार थे। आननफानन में पुलिस ने उसे एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया, जहां देर रात तक उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी।
खुल्दाबाद इंस्पेक्टर रोशनलाल का कहना है कि मौका ए वारदात पर हालात देखने के बाद साफ है कि बेटी को कत्ल करने के बाद राजेंद्र ने चाकू से ताबड़तोड़ वारकर खुद को भी मारने की कोशिश की। पत्नी की तहरीर पर उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।