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High Court : दहेज हत्या में मिली उम्रकैद से ससुर बरी, पति की कैद 10 साल में तब्दील

Thu, 09 Jul 2026 07:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या में मिली उम्रकैद से ससुर को बरी कर दिया जबकि पति की सजा घटाकर 10 साल सश्रम करावास में तब्दील कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कानपुर नगर निवासियों की अपील पर दिया है।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या में मिली उम्रकैद से ससुर को बरी कर दिया जबकि पति की सजा घटाकर 10 साल सश्रम करावास में तब्दील कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कानपुर नगर निवासियों की अपील पर दिया है।

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नौबस्ता थाना क्षेत्र में 2016 में देशराज की पत्नी सविता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मायकेवालों ने पति देशराज, ससुर राम सजीवन पर दहेज में पांच लाख रुपये की मांग करने और प्रताड़ित कर हत्या करने का आरोप लगाया था। ट्रायल कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट ने पाया कि ससुर के खिलाफ केवल सामान्य आरोप लगाए गए थे। वह खुद बेहद गरीब था। रिक्शा चलाकर जीवनयापन कर रहा था। पति को सजा सुनाने के दौरान ट्रायल कोर्ट ने उसकी समय सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को नजरअंदाज किया था। देशराज 2016 से जेल में है और अपनी सजा के नौ साल से अधिक काट चुका है। कोर्ट ने कहा कि सजा ऐसी होनी चाहिए जो अपराध की गंभीरता के अनुपात में हो। कोर्ट ने राम सजीवन को आरोप से बरी करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। 

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