इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभिरक्षा (कस्टडी) से जुड़े मामले में पिता को नाबालिग बेटे से हर रविवार मिलने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि मूल मामला चार साल से लंबित है। ऐसे में उसे और लंबित रखना उचित नहीं होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभिरक्षा (कस्टडी) से जुड़े मामले में पिता को नाबालिग बेटे से हर रविवार मिलने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि मूल मामला चार साल से लंबित है। ऐसे में उसे और लंबित रखना उचित नहीं होगा। परिवार न्यायालय इसका चार माह में निस्तारण करे।
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यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने अलीगढ़ निवासी पिता की याचिका पर दिया। परिवार न्यायालय ने आठ अक्तूबर 2025 के आदेश में पिता को बेटे की अंतरिम अभिरक्षा देने से इन्कार कर दिया था। उसे केवल महीने के अंतिम रविवार को सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक बेटे से मिलने का अधिकार दिया था। इस आदेश को पिता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद के कारण दोनों अलग रह रहे हैं। बेटा मां संग रह रहा है। बच्चे की अभिरक्षा से संबंधित मामला 2022 से लंबित है। यह वाद पहले नई दिल्ली के परिवार न्यायालय में लंबित था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अलीगढ़ स्थानांतरित किया गया। याची ने मुलाकात के अधिकार में बढ़ोतरी और अंतरिम अभिरक्षा की मांग की थी।