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बेटी के विवाह में नहीं आ सका पिता

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बारात भी आई और दुल्हन भी विदा हुई। लेकिन कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन का असर खुशियों की बारात में पानी फेरता नजर आया। बारात में टेंट, कनात, बैंड-बाजा, माली-फूल, अच्छे पकवान, नात-रिश्तेदार, पड़ोसी तक को शामिल नहीं किया गया था। इतना ही नही दुल्हन का पिता लॉकडाउन के चलते मुंबई शहर में लॉक रहकर अपनी बेबसी पर आंसू बहाता रहा और बेटी पराए घर बिदा हो गई। वहीं पिता के नही पहुंचने पर दुल्हन के बड़े पिता से कन्यादान की रश्म पूरी कराई गई। लाडली के विदाई पर लाचार पिता ने फोन से बेटी व दामाद को आशीर्वाद देते हुए खुद रो पडा। शादी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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मांडा क्षेत्र के एक गांव निवासी दीनानाथ चौधरी बसई मुंबई स्थित एक कंपनी में नौकरी करते हैं। बीते चार माह पहले उन्होंने अपनी बेटी कंचन की शादी मेजा थाना क्षेत्र निवासी अनूप चौधरी के साथ पक्की कर दी थी। वहीं वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के चलते शादी की तय शुदा तारीख को आगे बढ़ाने की बात की गई। लेकिन दोनों पक्षों में आपसी सहमति नहीं बनी। जिसके चलते सोमवार की रात लगभग आठ बजे दो बाइक व एक कार से दूल्हे सहित कुल पांच बाराती दुल्हन को लेने उसके घर पहुंच गए।
वहीं घर की महिलाओं द्वारा निर्मित बेसन के लड्डू व खोए की मिठाई और पकवान से बारातियों का स्वागत सत्कार किया गया। सामान्य दिनों में द्वारचार के समय डीजे, रोडलाइट, बैड-बाजे, पटाखे आदि फिजूलखर्ची जैसे रश्म के बिना शादी सम्पन्न हुई। जबकि लॉकडाउन के चलते दीनानाथ चौधरी अपनी बेटी कंचन का कन्यादान करने घर नहीं पहुंच सके। बड़े पिता हरिशंकर व बड़ी मां राजकुमारी ने कन्यादान किया। विदाई के समय दीनानाथ चौधरी ने फोन द्वारा बेटी से बात की। और अपनी बेबसी पर रोते हुए बेटी को खुश रहने का आशीर्वाद दिया। दुल्हन की मां पूनम व भाई विक्रम खुशी के लम्हों पर पिता के घर नहीं पहुंच पाने से मायूस दिखे।
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