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प्रयागराज। अब फसल बीमा खेती पर लागत के बजाय उपज के आधार पर होगा। इस व्यवस्था से किन्हीं कारणों से फसलों को नुकसान होने पर किसानों को अधिक भुगतान मिलेगा, लेकिन उन्हें प्रीमियम के रूप में अधिक राशि भी चुकानी होगी। इसके अलावा फसलों का बीमा भी ऐच्छिक कर दिया गया है। यानी, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लेने वाले कृषकों के लिए भी फसल बीमा अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि, अभी इसे लेकर निदेशालय की विस्तृत गाइडलाइन का इंतजार है।
फसल बीमा की शर्तों को लेकर कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। अब तक खेती पर आने वाली लागत को आधार बनाकर फसलों का बीमा किया जाता था। आपदा या अन्य कारणों से नुकसान पर इसी आधार पर भुगतान भी होता था, लेकिन अब अनुमानित उत्पादन के आधार पर बीमा होगा। ऐसे में किसानों को होने वाला भुगतान बढ़ जाएगा, लेकिन बीमा कंपनी प्रीमियम भी बढ़ाएगी। फसलों के आधार पर प्रीमियम तथा अन्य नियमों का निर्धारण किया जा रहा है। इसके अलावा अभी केसीसी लेने वाले सभी किसानों के लिए फसल बीमा कराना अनिवार्य था।
बीमा का प्रीमियम किसान के केकेसी खाता से ही कट जाता था। इसे लेकर किसानों के बड़े तबके में नाराजगी रही। नई नीति में यह बाध्यता भी खत्म कर दी गई है। फसल का बीमा कराना है या नहीं इसका निर्णय अब किसान लेंगे। उपनिदेशक कृषि विनोद कुमार ने बताया कि शासन स्तर पर विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
टिड्डी दल का खतरा बरकरार
-फिर जारी हुई एडवाइजरी, राजस्थान-मध्य प्रदेश में सक्रिय हैं आठ से 10 दल
प्रयागराज। जिले में टिड्डी दल का खतरा अभी बना हुआ है। मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा में आठ से 10 दल भ्रमणशील हैं। इसे लेकर कृषि विभाग की ओर से एक बार फिर एडवाइजरी जारी की गई है। अफसरों का कहना है कि धान की नर्सरी तैयार हो रही है। ऐसे में इस बार टिड्डियों का हमला हुआ तो खेती को काफी नुकसान होगा।
जिले में नौ जून को टिड्डी दल का हमला हुआ था। तीन दिन की मशक्कत के बाद दल के बड़े भाग को नष्ट कर दिया गया था। जो बचे रह गए थे, वह आगे निकल गए। अब इन्हें लेकर एक बार फिर अलर्ट जारी किया गया है। उप निदेशक कृषि विनोद कुमार ने बताया कि प्रयागराज से सीमावर्ती जिलों में टिड्डी दल सक्रिय हैं। इनके पीछे भी कई दल हैं। ऐसे में यदि हवा का रुख इधर की ओर हुआ तो एक बार फिर उनका हमला हो सकता है। बताया कि यह खतरा 15 जुलाई तक बना रहेगा। चूंकि इस समय नर्सरी खेतों में है, ऐसे में किसानों और सतर्क रहने की जरूरत है। इसके अलावा प्रशासन की ओर से भी पूरी तैयारी की गई है।