मऊआइमा में क्षति हुई धान की फसलों को देख कर किसानों के आंखें नम हो गई
क्षेत्र में बीते दिनों हवाओं के साथ हुई बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बारिश थमने के बाद खेतों में पहुंचे किसान बर्बादी का मंजर देखकर फफक पड़े। ग्राम सेमरा निवासी 70 वर्षीय राम कृपाल फसल की हालत देखकर बेसुध हो गए। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
लगातार बारिश से अधिकांश धान के खेतों में जलभराव हो गया। कई दिनों तक पानी भरा रहने से धान की जड़ें सड़ने लगी थीं। तेज हवा और दोबारा हुई बारिश ने बची-खुची फसल को भी बर्बाद कर दिया। किसानों के अनुसार, इस बार करीब 95 फीसदी तक धान की फसल प्रभावित हुई है। महीनों की मेहनत और पूंजी पानी में डूब गई, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। बीडीओ सुभाष चंद्र ने बताया कि पूर्व में हुए नुकसान का आकलन तहसील भेजा गया है। दोबारा हुए नुकसान का भी आकलन कराया जाएगा।
फसल नुकसान और मुआवजे की मांग
सुल्तानपुर खास, जोगापुर, महमदपुर सराय अली, मरखामऊ और मानी उमरपुर सहित कई गांवों में फसलें बर्बाद हुई हैं। दुबाही, रामनगर गंसियारी, बसौनापुर, मऊदोस्तपुर और बादीपुर गांवों में भी कई बीघा फसल पानी में डूब गई है। ताल क्षेत्रों जैसे सेमरा वीरभानपुर, सलेमपुर, जोगीपुर, सराय बादशाह कुली, महरौंडा और मसियांव में धान की शत-प्रतिशत फसल बर्बाद होने का दावा है। प्रभावित किसानों ने कर्ज लेकर लाखों रुपये की लागत से धान की खेती की थी। उपज की उम्मीद खत्म होने के बाद किसानों ने फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।