गंगा प्रदूषण नियंत्रण को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने गंगा में गिर रहे नालों के प्रबंधन पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी में लगाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्या ठीक तरीके से काम कर रहे हैं। गंगा में सीवर का पानी शोधन के बाद गिर रहा है या सीधे छोड़ा जा रहा है। कोर्ट ने गंगा किनारे बसे दूसरे शहरों की स्थिति भी बताने का निर्देश दिया है।
याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर र
ही है। कानपुर में चर्म उद्योग गंगा किनारे से हटाकर दूसरे स्थान पर ले जानेे के मुद्दे पर अगली तिथि पर सुनवाई होगी। कोर्ट ने न्यायमित्र अरुण गुप्ता ने याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदुओं का ब्यौरा कोर्ट को सौंपा। उन्होंने बताया कि एसटीपी ठीक तरीके से काम नहीं कर रहे हैं इसकी वजह से अधिकतर नाले गंगा में बिना शोधन के गिराए जा रहे हैं। कानपुर की टेनरी से निकलने वाला रसायन भी गंगा में प्रदूषण बढ़ा रहा है।
न्यायमित्र ने टेनरी दूसरी जगह शिफ्ट करने तथा दूसरे उद्योगों से निकलने वाले हानिकारक रसायनों को भी गंगा में गिरने से रोकने की मांग की। नहरों को अधिक पानी देने से गंगा के जलस्तर में गिरावट आई है। कूड़ा निस्तारण सयंत्र गंगा के किनारे से हटाने तथा माघ मेले के दौरान गंगा में पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखने की मांग उठाई गई। हाईकोर्ट दूसरे मुद्दों पर तीन सप्ताह के बाद सुनवाई करेगा। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट गंगा प्रदूषण के मुद्दे की वर्ष 2006 से मॉनिटरिंग कर रहा है। इस दौरान प्रदूषण निवारण के लिए कई महत्वपूर्ण आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने गंगा में सीधे कोई भी नाला खोलने पर रोक लगाई हुई है।