महाकुंभ मेले में टेंट और होटल बुकिंग को लेकर साइबर जालसाज सक्रिय हैं। साइबर पुलिस की रडार पर ऐसी कई वेबसाइट हैं जो लोगों को ठगने का प्रयास कर रही है। साइबर पुलिस की जांच में पता चला है कि महाकुंभ की अधिकतर फर्जी वेबसाइटें बिहार, कोलकाता, भरतपुर और दिल्ली से ऑपरेट हो रही है। इनको बंद करने के लिए साइबर पुलिस प्रयास कर रही है।
मेले में दूर-दराज के श्रद्धालुओं ने अभी से ही मेला क्षेत्र के टेंट हाउस और शहर के नामी होटलों में कमरा बुक करना शुरू कर दिया है। साइबर पुलिस के मुताबिक, इन दिनों महाकुंभ की फर्जी वेबसाइट में सबसे अधिक चार राज्यों का नाम सामने आया है।
इनमें बिहार का नवादा जिला नंबर वन है। 70 फीसदी से अधिक ऐसी वेबसाइटें हैं, जो यहां से होस्ट की जा रही हैं। इसके बाद कोलकाता, भरतपुर और दिल्ली का नंबर आता है। हाल ही में बंद करवाई गईं लगभग 54 वेबसाइटों में भी इन्हीं शहरों का नाम आया है।
सिर्फ एक अक्षर या डॉट का हेरफर
साइबर पुलिस के अफसरों ने बताया कि जालसाज मात्र एक अक्षर या डॉट का हेरफेर कर फर्जी वेबसाइट आसानी से तैयार कर देते हैं। बुकिंग कराने वाला नाम नोटिस नहीं करता है और वेबसाइट पर अपनी डिटेल भर देता है। जिससे वह ठगी का शिकार हो जाता है।
44 वेबसाइटों को रडार पर लिया
पहली बार महाकुंभ मेला क्षेत्र में साइबर थाना बनाया जा रहा है। जिसमें प्रदेश के चुनिंदा साइबर विशेषज्ञों की एक विशेष टीम बुलाई गई है। यही टीम फेक, डार्क वेबसाइट और सोशल मीडिया के शातिरों से श्रद्धालुओं को बचाने के लिए संदेहास्पद 44 वेबसाइटों को रडार पर लिया है। इनका होस्ट जानने के लिए टीम प्रयास कर रही है।
किसी के नाम से डोमेन लेना आसान
यूपी पुलिस के साइबर सलाहकार राहुल मिश्रा बताते हैं, किसी के नाम से डोमेन लेना बहुत आसान होता है। सरकारी विभाग, पुलिस विभाग, बड़े आयोजन, हस्तियों के नाम, हाेटल, फैक्टरी, नामी कंपनी आदि के नाम से बनी वेबसाइट के कुछ अक्षरों को बदल दिया जाता है। मिलता-जुलता नाम देखकर लोग जल्दबाजी में समझ नहीं पाते हैं। अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो ठगी से बचा सकता है।
पकड़े जाने के डर से बदलते हैं ठिकाने
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक, पकड़े जाने के डर से साइबर जालसाज नई-नई जगह पर अपनी लोकेशन बनाते हैं। कुछ जालसाज सिर्फ लैपटॉप लेकर घूम-घूमकर लोगों को ठगते हैं।