जानकारों का कहना है कि मुकदमा हुआ तो न सिर्फ पूर्व एसएसपी बल्कि उनके मददगारों की मुश्किलें बढ़नी भी तय है। यह वह पुलिसकर्मी हैं जो लगातार शिकायतों के बाद भी मलाईदार तैनाती पाते रहे। इसके अलावा जांच के दायरे में वह इंस्पेक्टर या दरोगा भी होंगे, जो निर्धारित मानक पूरा न करने के बावजूद थानों में बतौर प्रभारी तैनात हुए।
पहली लिस्ट से ही आ गए थे रडार पर
गौरतलब है कि तैनाती के बाद ट्रांसफर-पोस्टिंग की पहली ही लिस्ट से पूर्व एसएसपी अभिषेक रडार पर आ गए थे। चौकी प्रभारियों की इस सूची में लगभग 50 नाम थे लेकिन इनमें से कई ऐसे थे जो दागी होते हुए भी मलाईदार चौकियों में तैनात कर दिए गए थे। इसके बाद 27 इंस्पेक्टरों व 10 सब इंस्पेक्टरों की सूची जारी हुई और इसे लेकर भी कई सवाल उठे। दरअसल इसमें कई ऐसे इंस्पेक्टरों केनाम शामिल थे जिन्हें पूर्व में गंभीर आरोपों में हटाया गया था।
कई दरोगाओं को भी थाना प्रभारी बनाया गया और दो दरोगाओं के तैनाती स्थल में सूची जारी होने के कुछ घंटों बाद ही फेरबदल कर दिया गया जिसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। शिकायतों के मद्देनजर कुल 17 बिंदुओं पर जांच कराने के बाद शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था।