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राज्य की कानून व्यवस्था के खिलाफ असंतोष व्यक्त करना आपराधिक मामला नहीं : हाईकोर्ट

Sat, 26 Dec 2020 01:55 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि केवल राज्य के मामलों के खिलाफ असंतोष व्यक्त करना कोई आपराधिक मामला नहीं है। न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर असंतोष व्यक्त करना आपराधिक मामला नहीं है। यह हमारे संवैधानिक उदार लोकतंत्र की एक पहचान है, जो संवैधानिक रूप से संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संरक्षित है। इसी के साथ कोर्ट ने रमाबाईनगर के भोगनीपुर थाने में दर्ज एफआईआर और उसके परिप्रेक्ष्य में कार्यवाही निरस्त कर दी है।
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कोर्ट ने यह आदेश यशवंत सिंह की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची के विरुद्ध लगाई गई धाराओं से अपराध का कोई मामला नहीं बनता है इसलिए उसके विरुद्ध एफआईआर रद्द की जाती है। याची ने ट्वीट किया था कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी को 'जंगलराज' में बदल दिया है, जहां कानून व्यवस्था का कोई प्रचलन नहीं है।  याची की ओर से कहा गया कि राज्य के मामलों में टिप्पणी करना किसी भी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा है और महज मतभेद व्यक्त करना अपराध नहीं हो सकता।
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