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exclusive : इलाहाबाद विश्वविद्यालय कराता था हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 

Wed, 06 Jan 2021 08:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • माध्यमिक शिक्षा परिषद उ.प्र. की स्थापना के 100 साल
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यूपी बोर्ड। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) की स्थापना के इस साल सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। परीक्षार्थियों की सबसे अधिक संख्या के कारण यूपी बोर्ड न केवल देश में बल्कि विश्व के शिक्षा बोर्डों में अग्रणी स्थान रखता है। यदि इसके इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं इलाहाबाद विश्वविद्यालय कराता था। यूपी बोर्ड की पहली परीक्षा वर्ष 1923 में हुई थी। आजादी से पहले जन्मे बोर्ड के सौ साल के सफर में परीक्षार्थियों की संख्या लगभग एक हजार गुना तक बढ़ गई।

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यूपी बोर्ड
स्वर्णिम अतीत को समेटे यूपी बोर्ड इस साल अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में वर्ष 1921 में माध्यमिक शिक्षा परिषद की स्थापना से पहले प्रदेश में हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाएं इलाहाबाद विश्वविद्यालय कराता था। 1921 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अलग एक पृथक बोर्ड की स्थापना के लिए इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921 बनाया गया। 1921 में माध्यमिक शिक्षा परिषद की स्थापना के बाद उत्तर प्रदेश में पहली बोर्ड परीक्षा 1923 में आयोजित की गई। 
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय

देश में 10+2 परीक्षा पद्धति अपनाने वाला पहला शिक्षा बोर्ड

इलाहाबाद में माध्यमिक शिक्षा परिषद की स्थापना संयुक्त प्रांत वैधानिक परिषद (यूनाइटेड प्राविंस लेजिस्लेटिव काउंसिल) के एक अधिनियम के जरिये की गई थी। माध्यमिक शिक्षा परिषद भारत का पहला शिक्षा बोर्ड था, जिसने सबसे पहले 10+2 परीक्षा पद्धति अपनाई थी। इस पद्धति के तहत पहली बोर्ड परीक्षा का आयोजन 10 वर्षों की शिक्षा के उपरांत (जिसे हाई-स्कूल परीक्षा कहते हैं) किया गया, जबकि बोर्ड की दूसरी सार्वजनिक परीक्षा 10+2=12 वर्ष की शिक्षा के पश्चात, इंटरमीडिएट परीक्षा का आयोजन किया जाने लगा।

एक अप्रैल 1922 को रखी गई यूपी बोर्ड की नींव

इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 विधान परिषद से पारित होने के बाद संयुक्त प्रांत के तत्कालीन गवर्नर ने 30 सितंबर 1921 को अपनी स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से 10 दिसंबर 1921 को मंजूरी दी गई। इस अधिनियम को भारत सरकार की ओर से एक अप्रैल 1922 को लागू किया गया। अधिनियम लागू होने के बाद हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की पहली परीक्षा 1923 में कराई गई।

पहली बोर्ड परीक्षा में इंटरमीडिएट में मात्र 89 परीक्षार्थी शामिल हुए थे

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का स्थान लेने के बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से पहली बोर्ड परीक्षा में कुल पांच हजार सात सौ चौवालिस परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इसमें हाईस्कूल में 5655 परीक्षार्थी और इंटरमीडिएट में  मात्र 89 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। बोर्ड की स्थापना के शताब्दी वर्ष में यह संख्या 55 लाख से अधिक पहुंच गई। बीते 100 वर्ष में परीक्षार्थियों की संख्या लगभग एक हजार गुना तक बढ़ गई।
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