फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेहतरीन अध्यापक, लेकिन कम ही घुलते-मिलते थे प्रोफेसर मो.शाहिद

Fri, 24 Apr 2020 01:24 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
Prayagraj News: Arrested Allahabad University Prof. Mohammed Shahid - फोटो : prayagraj
विज्ञापन
जमातियों को चोरी छिपे शहर में शरण दिलाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मो. राशिद को जेल भेजे जाने के बाद उन्हें जानने वाले स्तब्ध हैं। उनका कहना है कि प्रोफेसर एक बेहतरीन अध्यापक हैं। यह बात अलग है कि वह लोगों से कम ही घुलते मिलते हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि प्रोफेसर को अपने दिल्ली से लौटने की बात छिपानी नहीं चाहिए थी। 
विज्ञापन


इविवि उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर एए फातमी कहते हैं कि प्रोफेसर मो. राशिद बेहद ही अनुशासित जीवन जीने वाले शख्स हैं। वह एक बेहतरीन अध्यापक हैं और यह इसी से पता चलता है कि उनकी कक्षाएं हमेशा छात्रों से पटी रहती हैं। लेकिन उनका लोगों से घुलना-मिलना बेहद कम रहता था। उनके भाई, जो खुद भी विवि में प्रोफेसर हैं, वह विवि की कई कमेटियों में रहे लेकिन प्रोफेसर शाहिद कभी इनमें शामिल नहीं हुए।

अपने विभाग को छोड़कर अन्य विभागों में आयोजित सेमिनार से भी वह दूरी बनाए रहते थे। हालांकि प्रोफेसर फातमी यह भी कहते हैं कि उन्हें कम से कम अपने दिल्ली से लौटकर आने की जानकारी प्रशासन को देनी चाहिए थी। इसलिए क्योंकि इससे न सिर्फ उनके संपर्क में आने वालों बल्कि उनके आसपास के लोगों को भी खतरा हो सकता था। 

आरटीआई का जवाब देने में मास्टर हैं प्रो. शाहिद

राजनीति विज्ञान विभाग से बीए, एमए और इसके बाद पांच-छह वर्षों तक शोध करने वाले एक छात्र ने बताया कि प्रो. शाहिद ने अपने शोधर्थियों के चयन में कभी धर्म को आड़े नहीं आने दिया। विश्वविद्यालय की आंतरिक राजनीति से उन्होंने हमेशा दूरी बनाकर रखी। वहीं, कुछ शिक्षकों ने बताया कि परीक्षा और प्रवेश संबंधी प्रक्रिया में  भी उनकी सक्रिय भागीदारी होती।
विज्ञापन


एक छात्र ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में उसने प्रोफेसर को कभी ऊंची आवाज में बात करते भी नहीं सुना। हालांकि दबी जुबान से स्वीकार किया कि प्रोफेसर के विदेश जाने को लेकर विभाग में अक्सर चर्चा हुआ करती थी लेकिन उनकी कार्यशैली को देखते हुए इन मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया जाता था। कुछ छात्रों ने यह सवाल भी उठाया कि इविवि प्रशासन से बिना एनओसी मिले प्रोफेसर विदेश कैसे जा सकते हैं। ऐसे में इविवि प्रशासन की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें