इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक के बाद महिला की मृत्यु हो जाती है, तो उसे मिलने वाली धनराशि उसकी संपत्ति मानी जाएगी। उस पर उसके माता-पिता का अधिकार होगा। तलाक की डिक्री के बाद पति का उत्तराधिकार अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है। पूर्व पति इस संपत्ति पर कोई दावा नहीं कर सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकल पीठ ने मृतका किरन रायकवार की मां की याचिका स्वीकार करते हुए दिया।
मामला बांदा जनपद के फैमिली कोर्ट से जुड़ा है जहां किरन रायकवार और उनके पति के बीच आपसी सहमति से तलाक हुआ था। समझौते के तहत पति को पत्नी को 20 लाख रुपये देने थे। इसमें से चार लाख रुपये पहले ही दिए जा चुके थे, जबकि शेष 16 लाख रुपये अदालत में जमा कराए गए थे। अदालत की ओर से इस राशि का चेक तैयार कर लिया गया था, लेकिन उसे प्राप्त करने से पहले ही 16 जुलाई 2024 को किरन रायकवार की मृत्यु हो गई। इसके बाद मृतका की मां ने शेष 16 लाख रुपये पर दावा किया।
पति ने इसका विरोध करते हुए दलील दी कि यह राशि केवल पत्नी के भरण-पोषण के लिए थी और उसकी मृत्यु के बाद किसी अन्य को नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार महिला को मिलने वाली कोई भी राशि चाहे वह भरण-पोषण हो या न्यायालय के आदेश से मिली हो, वह उसकी व्यक्तिगत संपत्ति होती है। इस मामले में दंपती की कोई संतान नहीं थी और तलाक के बाद पति उत्तराधिकारी नहीं रह जाता। इसलिए संपत्ति पर माता-पिता का अधिकार बनता है।
हाईकोर्ट ने बांदा के फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने के दो सप्ताह के भीतर शेष 16 लाख रुपये मृतका की मां को जारी किए जाएं।