प्रांत के भीतर माल के परिवहन के लिए 15 अप्रैल से ई-वे बिल अनिवार्य होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में मंगलवार को आदेश जारी कर दिया। प्रदेश के भीतर सभी वस्तुओं को एक से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए व्यापारियों को ई-वे बिल लगाना होगा। पहले चरण में उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में इसे लागू किया जा रहा है।
जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने एक फरवरी को राष्ट्रीय ई-वे बिल लागू किया। इसके तहत व्यापारियों को जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही ई-वे बिल डाउनलोड करना था लेकिन जीएसटी पोर्टल के न चलने के कारण उसे वापस ले लिया गया। इसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से नौ फरवरी को ई-वे बिल की व्यवस्था लागू की गई। जीएसटी पोर्टल में सुधार के बाद केंद्र ने प्रांत के बाहर से 50 हजार रुपये या उससे अधिक का माल मंगाने के लिए एक अप्रैल से ई-वे बिल अनिवार्य किया। इसके बाद अब केंद्र की ओर से प्रांत के भीतर एक से दूसरे स्थान पर माल भेजने के लिए भी राष्ट्रीय ई-वे बिल लागू करने का आदेश जारी कर दिया गया।
केंद्र ने पहले चरण में उत्तर प्रदेश समेत आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल तथा तेलंगाना में 15 अप्रैल से ई-वे बिल लागू करने का आदेश जारी किया है। कर मुक्त वस्तुओं के परिवहन पर इसके इस्तेमाल की जरूरत नहीं होगी। कैट के अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने इसका स्वागत किया है।
व्यापारियों को कराना होगा रजिस्ट्रेशन
ई-वे बिल डाउनलोड करने के लिए व्यापारियों को जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि व्यापारी पोर्टल पर जाकर तत्काल रजिस्ट्रेशन करा लें, ताकि 15 अप्रैल से इसके लागू होने पर माल के परिवहन पर किसी तरह की दिक्कत न हो।