इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में जातिगत आधार पर नंबर दिए जाने का आरोप लगाने पर इविवि प्रशासन ने मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हालांकि मामला दो साल पुराना है।
डॉ. विक्रम ने दो साल पहले 21 अक्तूबर 2019 को एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जातिगत आधार पर नंबर दिए जाते हैं। उन्होंने इविवि प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए विश्वविद्यालय में जातिवाद हावी होने के गंभीर आरोप गए थे। आरोप लगाए थे कि शिक्षक और छात्र जाति के आधार पर बंटे हुए हैं। शोधार्थी अपने शोध निदेशक के अलावा किसी दूसरे शिक्षक से भी नहीं मिल पाते हैं।
सीनियर और जूनियर शिक्षकों में आपसी खींचतान रहती है। इससे शोध का स्तर भी गिर रहा है। डॉ. विक्रम ने तत्कालीन कुलपति से ऐसे तमाम मामलों के समाधान की मांग की थी। इस मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान में लेते हुए इविवि प्रशासन से पूछा कि इस अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
इसी क्रम में रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला की ओर से डॉ. विक्रम को नोटिस जारी पूछा गया है कि उन्होंने जिस आधार पर यह आरोप लगाए हैं, अभिलेखीय साक्ष्य के साथ इविवि प्रशासन को उससे अवगत कराएं। अगर वह कोई जवाब नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, डॉ. विक्रम का कहना है कि कई छात्रों ने उनसे मिलकर कहा था कि जातिगत आधार पर उन्हें कम अंक दिए गए। उन्होंने सिर्फ छात्रों की बात रखी थी।
‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में एक छात्र की ओर से की गई शिकायत के संदर्भ में आयोग ने विश्वविद्यालय से जानकारी मांगी है। डॉ. विक्रम से इसी मामले में जवाब मांगा गया है।’ डॉ. जया कपूर, पीआरओ, इविवि