घूरपुर मे सामूहिक दुष्कर्म की शिकार मासूम हर जगह ठगी गई। मां-बाप की मौत के बाद उसे कहीं सहारा नहीं मिला। अंत में वह दरिंदों की चंगुल में फंस गई।
गांव वालों के मुताबिक, किशोरी के मां-बाप की मौत लगभग आठ वर्ष पहले हो गई थी। मां-बाप की मौत के बाद दोनों बच्चे अपने घर पर ही रहते थे। किशोरी अपने भाई से बड़ी थी तो पड़ोस के लोगों के खेतों में कुछ काम कर जीवन बसर करती थी। घर कच्चा था कुछ दिन बाद वह गिर गया। इसके बाद वह बेघर हो गए। गौहनिया के पास के एक गांव में रहने वाले उनके रिश्तेदार दोनों बच्चों को साथ ले गए। दोनों कुछ महीने वहां रहे। बताया जाता है कि उनके व्यवहार की वजह से दोनों वापस लौट आए। तत्कालीन ग्राम प्रधान की मदद से घर पर टिन शेड बनाकर दिया गया। लोगों के खेतों में काम करके किसी तरह गुजारा हो रहा था।
इसी बीच दरिंदों की नजर इनपर पड़ी। जाल बुनकर बच्चों को फंसा लिया और होटल में नौकरी दिलाने का सब्जबाग दिखाकर उन्हें ले गए। बाद में बंधक बनाकर सामूहिक दुराचार जैसे अमानवीय कार्य करते रहे। पीड़िता ने गांव की महिलाओं से बताया कि वह लोग इंजेक्शन लगाते थे। इसके बाद सुधबुध खो जाती थी। गांव की महिलाओं ने बताया कि किशोरी सदमे में है। लेकिन, उसकी आपबीती से हर किसी की रूह कांप जा रही है। बड़ा सवाल उसके छोटे भाई का है। वह कहां है, उसके साथ क्या हुआ। पुलिस कब तक इस सवाल का जवाब खोज पाती है।