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UPPSC : आयोग के हर सेक्शन में होगा बायोमीट्रिक प्रवेश, अलग होंगे इंटरव्यू कक्ष

Wed, 21 May 2025 01:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) परिसर में हाई सिक्योरिटी वाली 11 मंजिल की इमारत ‘आकाश गंगा’ का निर्माण शुरू होने जा रहा है। इसमें हर सेक्शन (अनुभाग) में बायोमीट्रिक प्रवेश होंगे।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की आकाश गंगा का शिलान्यास करते अध्यक्ष संजय श्रीनेत। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) परिसर में हाई सिक्योरिटी वाली 11 मंजिल की इमारत ‘आकाश गंगा’ का निर्माण शुरू होने जा रहा है। इसमें हर सेक्शन (अनुभाग) में बायोमीट्रिक प्रवेश होंगे, इंटरव्यू कक्ष अलग से बनाए जाएंगे और हर अनुभाग में संबंधित अधिकारी व कर्मचारी ही प्रवेश कर सकेंगे। निर्माण कार्य 18 माह में पूरा हो जाएगा।

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112 करोड़ की लागत से 22578.3 वर्ग फीट क्षेत्र में प्रस्तावित इस बिल्डिंग का शिलान्यास आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने मंगलवार दोपहर दो बजे किया। आयोग में वर्ष 1937 के बाद कोई नई इमारत बनने जा रही है। अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हाई सिक्योरिटी वाली इस इमारत के भूतल पर 600-600 परीक्षार्थियों के बैठने की क्षमता वाले दो परीक्षा कक्ष और 100-100 अभ्यर्थियों की क्षमता वाले दो ऑनलाइन कंप्यूटर टेस्ट सेंटर होंगे।

हालांकि, वर्तमान में आयोग कोई ऑनलाइन परीक्षा नहीं कराता है, लेकिन भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसके लिए दो हजार वर्ग फीट की जगह आरक्षित की गई है। पहली मंजिल पर डॉक्युमेंट स्क्रूटनी के साथ प्रतीक्षालय व कैफेटेरिया होगा। दूसरी मंजिल पर अभ्यर्थियों के इंटरव्यू होंगे। इंटरव्यू कक्ष में कोई फोन नहीं होगा और न ही किसी सदस्य की नेमप्लेट लगेगी, ताकि गोपनीयता व पारदर्शिता और मजबूत हो।

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तीसरी मंजिल पर आयोग अध्यक्ष का कार्यालय, ट्रेनिंग रूम, मीटिंग रूम व अध्यक्ष के लिए अलग से इंटरव्यू रूम बनाया जाएगा। चौथी मंजिल पर विधि अनुभाग एवं आयोग सदस्यों के कार्यालय होंगे। पांचवीं मंजिल पर सीधी भर्ती के लिए सेवा अनुभाग, छठवीं मंजिल पर अवस्थापना अनुभाग, सातवीं मंजिल पर सचिव और वित्त के कार्यालय और आठवीं मंजिल पर कंप्यूटर अनुभाग होगा। नौवीं, दसवीं व 11वीं मंजिल पर परीक्षा अनुभाग होगा। खास यह कि हर अनुभाग में बायोमीट्रिक कार्ड से प्रवेश दिए जाएंगे और अनुभाग में तैनात संबंधित अधिकारी व कर्मचारी ही प्रवेश पा सकेंगे।

परीक्षा के लिए कर्मचारियों व अधिकारियों को अलग से बायोमीट्रिक कार्ड जारी किए जाएंगे। आयोग की नई बिल्डिंग के शिलान्यास के मौके पर सदस्य कल्पराज सिंह, डॉ. एचपी सिंह, डॉ. एके वर्मा, डॉ. राम प्यारे, सचिव अशोक कुमार समेत सभी अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

पुरानी बिल्डिंग में बनेगा गेस्ट हाउस

नई बिल्डिंग में आयोग के सभी कार्यालय व अनुभाग शिफ्ट होने के बाद पुरानी बिल्डिंग में गेस्ट हाउस बनाया जाएगा, ताकि बाहर से आने वाले परीक्षकों और विशेषज्ञों के ठहराने की उचित व्यवस्था की जा सके। इससे परीक्षकों व विशेषज्ञों की गोपनीयता को लेकर स्थिति और मजबूत होगी।

सौर ऊर्जा पर आधारित होंगी नई व पुरानी बिल्डिंग

आयोग की नई व पुरानी बिल्डिंग सौर ऊर्जा पर आधारित होंगी। पुरानी बिल्डिंग में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए शासन से मंजूरी मिल गई है। वहीं, नई बिल्डिंग में निर्माण कार्य कराने वाली एजेंसी ही सौर ऊर्जा के उपकरण लगाएगी।
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आयोग में ही 90 फीसदी अभ्यर्थियों की होगी परीक्षा

वर्तमान में आयोग के लखनऊ स्थित कैंप कार्यालय में चार हजार परीक्षार्थियों और प्रयागराज मुख्यालय में 800 परीक्षार्थियों के बैठने की व्यवस्था है। 1200 की क्षमता वाले दो नए परीक्षा कक्ष बनने के बाद एक साथ छह हजार परीक्षार्थियों की परीक्षा कराने की व्यवस्था हो सकेगी। पीसीएस, पीसीएस जे व अन्य मुख्य परीक्षाओं में इसके आसपास ही परीक्षार्थी होते हैं। ऐसे में 90 फीसदी परीक्षार्थियों की परीक्षा आयोग में ही कराई जा सकेगी और परीक्षा के लिए आयोग को बहुत ही सीमित संख्या में अतिरिक्त केंद्रों की जरूरत पड़ेगी।

आयोग परिसर में ही हो सकेगा टाइपिंग टेस्ट

नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अपर निजी सचिव, आरओ/एआरओ भर्ती जैसी परीक्षाओं में कंप्यूटर टाइपिंग टेस्ट आयोग परिसर में ही कराया जाएगा। वर्तमान में आयोग को इसके लिए दूसरे संस्थानों में केंद्र बनाने पड़ते हैं, लेकिन नई बिल्डिंग में ऑनलाइन कंप्यूटर टेस्ट सेंटर बनने से दूसरी जगह केंद्र नहीं बनाने होंगे और इससे परीक्षा पर आयोग का नियंत्रण रहेगा। साथ ही पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

प्रवेश द्वार पर होगी आदिशंकराचार्य की प्रतिमा

नई इमारत के प्रवेश द्वार के ऊपर बद्रीनाथ में बनी आदिशंकराचार्य जैसी प्रतिमा लगाई जाएगी और इमारत के शीर्ष पर स्थित गुंबद पर भारत सरकार का चिह्न होगा। इमारत के निर्माण में सैंड स्टोन का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे रंगाई-पुताई की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
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