इसी तरह से कई रिपोर्ट में मानक के बारे में बताया गया है, लेकिन कार्य की गुणवत्ता पर स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है। इन रिपोर्टों से आशंका जताई जा रही है कि जांच कमेटी में शामिल अफसरों ने एक-दूसरे को बचाने की कोशिश की है। इसके चलते इनकी मजिस्ट्रेट से दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया गया है। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत का कहना है कि ज्यादातर टीमों ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है। उनका अध्ययन किया जा रहा है। कई रिपोर्टों में स्पष्टता नहीं है। इनकी मजिस्ट्रेट से जांच कराई जाएगी। इसके लिए शुक्रवार को डीएम की मौजूदगी में कलेक्ट्रेट में बैठक बुलाई गई है। उसमें मजिस्ट्रेट भी मौजूद रहेंगे।
नालियों की कनेक्टिविटी पर बैठक कल
प्राधिकरण की ओर से सड़क चौड़ीकरण के संग बनाई गईं नालियों में जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई है। इन्हें कहीं कनेक्ट ही नहीं किया गया है। इसके अलावा नालियों की ढाल ठीक न होने समेत अन्य खामियां भी हैं। नगर निगम की ओर से ऐसी 44 नालियों की सूची सौंपी गई है। इस पर भी मंडलायुक्त की ओर से नगर आयुक्त और प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की मौजूदगी में दोनों संस्थाओं के जिम्मेदार अफसरों की 22 मई को बैठक बुलाई गई है।