पश्चिमशरीरा। सरसवां ब्लॉक के रक्सौली गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को राजा परीक्षित जन्म की कथा सुनाई गई। कथावाचक राजकुमार मिश्र ने बताया कि जन्म-जन्मांतर और युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है, तब ऐसा अनुष्ठान होता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पापी भी पाप मुक्त हो जाते हैं।
वेदों का सार युगों-युगों से मानवजाति तक पहुंचाता रहा है। भागवत पुराण वही सनातन ज्ञान प्रवाह है, जो वेदों से प्रवाहित होती चली आई है। इसलिए भागवत महापुराण को वेदों का सार कहा गया है। बताया कि युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने पर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया था।
दूसरी ओर अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। इस दौरान यजमान देवमूरत तिवारी, सत्यनारायण तिवारी, श्रीधर पाण्डेय, प्रदीप सिंह, बृजमोहन और मुन्ना श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।