बारा के उमापुर गांव में शनिवार दोपहर मरम्मत करते समय कच्ची दीवार ढह गई। दीवार के मलबे में मां और बेटे दब गए। दीवार गिरने से गांव में हड़कंप मच गया। गांववाले जब तक मलबा हटाकर मां-बेटे को बाहर निकालते बेटे की सांस थम चुकी थी, जबकि मां खून से लथपथ तड़प रही थी। महिला की हालत गंभीर बनी हुई है।
उमापुर गांव के सुरेंद्र कुमार मिश्र खेती किसानी करते हैं। उनके चार लड़के और एक बेटी हैं। चौथे नंबर का बेटा विष्णुकांत (12) गांव के प्राथमिक विद्यालय में चौथी कक्षा का छात्र था। शनिवार दोपहर विष्णुकांत मां विमला के साथ कच्चे घर की दीवार की मरम्मत में मदद कर रहा था। दोपहर लगभग सवा 12 बजे घर के बाहरी हिस्से की जर्जर हो चुकी दीवार ढह गई। बगल में खड़ी विमला और विष्णुकांत मलबे में दब गए। गांव में दीवार ढहने की खबर से खलबली मच गई।
गांव के लोग भागकर पहुंचे। मिट्टी के नीचे दबे मां, बेटे को निक ालने लगे, लेकिन इसमें तकरीबन बीस मिनट का समय लग गया। जब मलबे के नीचे दबे विष्णुकांत और विमला को निकाला गया तो विष्णुकांत दम तोड़ चुका था, जबकि विमला की सांस चल रही थी। वह खून से लथपथ तड़प रही थी। घरवाले उसे लेकर जसरा प्राथमिक अस्पताल ले गए। जहां से हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे शहर के एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया। विमला की हालत नाजुक बनी हुई है। वहीं विष्णुकांत की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है। होली के त्यौहार के चलते मां-बेटे दीवार की मरम्मत कर रहे थे। हादसे से सुरेंद्र का रो-रोकर बुरा हाल है।