कोर्ट ने कहा निराधार, निरर्थक, मनगढ़ंत आपराधिक केस में ही विशेष स्थिति में हस्तक्षेप किया जा सकता है। वर्तमान केस रद्द करने का कोई आधार नहीं है। याची का कहना था वह अस्पताल का संचालन कर रही थी। अस्पताल प्रबंध समिति की अध्यक्ष थी। ट्रस्ट को कोई नुक्सान या स्वयं को फायदा पहुंचाने का काम नहीं किया है। उसकी 90 साल की आयु है। कैंसर से पीड़ित हैं। छ: साल बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। याची ने भी राजीव गुप्ता व अन्य लोगों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज व जाली हस्ताक्षर से आपराधिक केस दर्ज कराने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उसने कोई अपराध नहीं किया है। किंतु कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया।