इंजीनियरिंग की डिग्री वाले नहीं बन सकते जूनियर इंजीनियर
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जूनियर इंजीनियर पद पर नियुक्ति की अर्हता इंजीनियरिंग में डिप्लोमा है। इंजीनियरिंग की डिग्री रखने वाले जूनियर इंजीनियर नहीं बन सकते हैं। तीन जजों की पूर्णपीठ ने इस विधिक प्रश्न का समाधान करते हुए कहा है कि सरकार नियोक्ता है। किसी भी पद पर नियुक्ति की योग्यता, अर्हता निर्धारित करने का उसी को अधिकार है। कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति बीके नारायण, न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पूर्ण पीठ ने दीपक सिंह और दर्जनों अन्य याचिकाओं पर उठे सवालों का निस्तारण करते हुए दिया है।
कोर्ट ने इंजीनियरिंग डिग्री धारकों की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि इंजीनियरिंग डिग्री बेहतर योग्यता है, इसलिए जूनियर इंजीनियर के पद पर उनकी भी नियुक्ति की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा डिप्लोमा और डिग्री भिन्न योग्यता है। दोनों की तुलना नहीं की जा सकती। इसलिए सरकार का जूनियर इंजीनियर की नियुक्ति से इंजीनियरिंग डिग्री को अलग रखने का निर्णय सही है। इंजीनियर डिग्री धारक जूनियर इंजीनियर पद की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकते।
कोर्ट ने कहा कि जरूरत के हिसाब से सरकार को पद की योग्यता निर्धारित करने का अधिकार है। कोर्ट नियुक्ति योग्यता की शर्तें तय नहीं कर सकती। ओ लेवल डिप्लोमा और एपीजीडीसीए समान योग्यताएं नहीं हैं। दोनों अलग हैं। इस फैसले के बाद पूर्णपीठ ने सभी याचिकाएं निर्णय के लिए एकल न्यायपीठ को संदर्भित कर दी हैं।
इंजीनियरिंग डिग्री धारकों का कहना था कि वह डिप्लोमा से बेहतर योग्यता रखते हैं, इसलिए जूनियर इंजीनियर भर्ती में उन्हें शामिल किया जाए। सरकार द्वारा अनुमति न देने पर चुनौती दी गई है। उ प्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अधिवक्ता के एस कुशवाहा का कहना था कि याचीगण निर्धारित योग्यता नहीं रखते। जूनियर इंजीनियर के लिए अर्हता इंजीनियरिंग में डिप्लोमा तय की गई है।