prayagraj news : राधेश्याम त्रिवेदी फाइल फोटो
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1995 से लेकर 2003। लगभग एक दशक का यह समय जिले में रहने वाले अपराधियों के लिए बेहद कठिन या यूं कहें तो दुरुह हो गया था। इसकी सबसे बड़ी वजह एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहे जाने वाले इंस्पेक्टर राधेश्याम त्रिवेदी थे। शहर कोतवाल समेत जिले के कई थानों की कमान संभालने के दौरान उन्होंने बड़े-बड़े अपराधियों को नाको चने चबवा दिए। यही वजह थी कि शनिवार को इस जांबाज पुलिसकर्मी के निधन की खबरें आईं तो शहरियों के जेहन में फिर से उनके बहादुरी के किस्सों की यादें ताजा हो गईं।
पूर्व इंस्पेक्टर ने शनिवार को 71 साल की आयु में सीतापुर जनपद स्थित पैतृक आवास में अंतिम संासें लीं। अपने सेवाकाल में वह करीब एक दशक तक इलाहाबाद में तैनात रहे। इस दौरान कीडगंज, नैनी व कोतवाली समेत शहर के कई थानों के प्रभारी भी रहे। अपनी कड़कमिजाज कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व इंस्पेक्टर अपराधियों के लिए काल बने रहे। यूं तो उन्होंने ढेरों अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया लेकिन उनका सबसे चर्चित एनकाउंटर 2001 में रहा जिसमें उन्होंने पेशी पर जाने के दौरान फरार हुए दो बंदियों को जवाबी फायरिंग में ढेर कर दिया था।
बताया जाता है कि 2001 में नैनी जेल से बंदी पेशी पर ले जाए जा रहे थे। अभी प्रिजन वैन बैरहना इलाके में ही पहुंची थी कि पांच कैदी प्रिजन वैन से कूदकर फरार हो गए थे। दिनदहाड़े हुई इस घटना ने जिले के अफसरों के भी होश उड़ा दिए थे। फरार बंदियों को पकड़ने की जिम्मेदारी जिले के सबसे तेजतर्रार इंस्पेक्टर राधेश्याम त्रिवेदी को सौंपी गई। जो अफसरों के भरोसे पर पूरी तरह खरे उतरे। कुछ ही दिनों बाद उन्होंने साउथ मलाका में हुए मुठभेड़ में फरार दो बंदियों को ढेर कर दिया जबकि तीन अन्य को भी गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा भी अपराधियों को सबक सिखाने की उनकी कई घटनाएं खासा चर्चित रहीं।