इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रयाग संगीत समिति और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में बृहस्पतिवार को समिति में क्षितिज श्रृंखला के अंतर्गत उपशास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियां हुईं। लखनऊ के गायक उस्ताद गुलशन भारतीय एवं साथियों ने लखनऊ घराने की पारंपरिक ठुमरी, दादरा, कजरी और गजल प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत सचिव अरुण कुमार और कोषाध्यक्ष आदित्य नारायण ने दीप जलाकर की।
पारंपरिक ठुमरी ‘कोऊ डारो पपीहा को मार’, दादरा ‘सुध न लेनी जब से गए नैनवा लगा के’, कजरी ‘बैठी सोंचे बृज बाम सूनो लागे मेरो धाम’ को खूब पसंद किया गया। दादरा ‘झमाझम पानी भरे री कौन अलबेली की नार’, गजल ‘आंख से आंख मिलाता है कोई, दिल को खींचे लिए जाता है कोई’ और ‘चाक हो परदे वहशत, मुझे मंजूर नहीं’ प्रस्तुतियों ने खूब तालियां बटोरी। तबले पर पं. ठाकुर प्रसाद मिश्रा, सारंगी पर उस्ताद सफीक हुसैन ने दी और मीना वर्मा सहकलाकार रहीं। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों को नटराज की मूर्ति देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मधुरानी शुक्ला ने किया। कार्यक्रम में सहायक निदेशक देवेंद्र सिंह, शंकरी गुहा, नवीन चंद्र, अरुण कुमार, श्रवण कुमार, विनय कुमार, सुनील मिश्रा समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।