इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत के आदेश की अवहेलना को अधिकरियों की ओर से अनजाने में की गई कार्रवाई नहीं माना जा सकता। सरकारी अधिकारी ही अगर अदालत के आदेश को अनदेखा करेंगे, तो कानून पर जनता का भरोसा कैसे रहेगा? इस तल्ख टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने ट्रस्टी कुंवर शेखर कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रयागराज के सोसाइटी रजिस्ट्रार की ओर से आर्यन एजुकेशन ट्रस्ट के 26 सितंबर को कराए गए चुनाव को रद्द कर दिया। साथ ही पूर्व में पारित आदेश के क्रम में नए सिरे से चुनाव कराने की जिम्मेदारी आजमगढ़ के सोसाइटी रजिस्ट्रार को सौंपी दी।
दरअसल, इस ट्रस्ट के प्रबंधन के चुनाव को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है। पिछले साल 19 फरवरी को अदालत ने साफ आदेश दिया था कि इस विवाद की सुनवाई और फैसला सहायक रजिस्ट्रार, आजमगढ़ करेंगे, और प्रयागराज के अधिकारी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इसके बावजूद प्रयागराज के सहायक रजिस्ट्रार ने 25 और 26 सितंबर 2025 को नया चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया। इसके क्रम में 26 सितम्बर को चुनाव भी करवा दिया गया।
इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे याची ने चुनाव व सोसायटी रजिस्ट्रार के आदेशों की वैद्यता को चुनौती दी। दलील दी कि प्रयागराज के सोसाइटी रजिस्ट्रार की ओर से पारित चुनाव संबधी सभी आदेश कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहे सोसाइटी रजिस्ट्रार ने कहा कि उनसे अनजाने में गलती हो गई।
हालांकि, कोर्ट ने उनकी प्रतिक्रिया पर हैरानी जताई। कहा कि सरकारी अधिकारियों की ओर से अदालत के आदेशों की अनदेखी न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। लिहाजा, कोर्ट इसे नजरंदाज नहीं करेगी।कोर्ट ने सोसाइटी रजिस्ट्रार प्रयागराज के आदेशों के आधार पर हुए ट्रस्ट के चुनाव की रद्द कर दिया। साथ ही यह आदेश भी दिया कि अब नया चुनाव सहायक रजिस्ट्रार, आजमगढ़ की देखरेख में कराए जाएगा।