बड़ोखर के जवाबांध गांव शुक्रवार रात तेज बारिश के बीच कच्चा मकान ढहने से कन्हैयालाल (60) की मौत हो गई। रातभर शव मलबे में दबा रहा। शनिवार सुबह करीब छह बजे उनके छोटे भाई राम सुंदर ने कच्चा मकान गिरा देखा। आसपास के लोगों को सूचना दी।
पड़ोसियों की मदद से शव को मलबे से बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी ठाकुर प्रसाद और कोरांव इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
कन्हैयालाल की पत्नी का निधन हो चुका है। उनकी कोई संतान नहीं है। इस वजह से वह अकेले ही कच्चे मकान में रहते थे। उनके भाई राम सुंदर ने बताया कि कन्हैयालाल शुक्रवार रात खाना खाने के बाद कच्चे मकान में सोने चले गए।
रात में तेज बारिश हो रही है। हम लोग भी परिवार के साथ खाना खाने के बाद सो गए। रात में मकान ढह गया। सुबह उठने पर घर गिरा देखा तो पड़ोसियों और घर के बच्चों को बुलाया गया। उनके शव को मलबे से बाहर निकालकर पुलिस को सूचना दी गई।
राम सुंदर ने बताया कि अफसरों की लापरवाही की वजह से कन्हैयालाल को सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। वहीं, एसडीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए उनका नाम नई सूची में था।
सरकारी आवास न मिलने का आरोप
राम सुंदर ने बताया कि उन्हें सरकारी आवास मिल गया था लेकिन कन्हैयालाल को यह सुविधा नहीं मिल पाई थी। अगर घर पक्का होता तो ये हादसा न होता। इसे टाला जा सकता था। परिवार ने मामले में न्याय की मांग की है।