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Research : गर्मी में हुई 51.33 फीसदी हत्याएं, तापमान बढ़ने पर गुस्सैल होते हैं लोग, शोध में खुलासा

Thu, 20 Feb 2025 11:51 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) के फॉरेंसिक विभाग के शोध में पाया गया है कि गर्मी में हत्याएं अधिक होती हैं। शोध में हत्या का समय, तरीका, कारण, लिंग, धर्म सहित अन्य पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया गया।
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हत्या। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) के फॉरेंसिक विभाग के शोध में पाया गया है कि गर्मी में हत्याएं अधिक होती हैं। शोध में हत्या का समय, तरीका, कारण, लिंग, धर्म सहित अन्य पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया गया। गर्मी में 51.33 फीसदी हत्याएं हुई हैं। इस मौसम में व्यक्ति ज्यादा गुस्सैल हो जाता है। वह देर रात तक घर से बाहर रहता है। अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक चले शोध में 150 शवों का परीक्षण के दौरान ये बातें सामने आई हैं।

यह शोध फॉरेंसिक विभाग के डॉ. हैदर ने असिस्टेंट प्रो. डॉ. राजेश कुमार राय और विभाग अध्यक्ष डॉ. अर्चना कौल के निर्देशन में एसआरएन के ट्रॉमा सेंटर और पोस्टमार्टम हाउस में किया गया। शोध में पाया गया कि सर्दी में 28 और बारिश में 20.6 फीसदी हत्याएं हुई। शोध में जिन लोगों की हत्या की गई, उनमें अधिकांश की उम्र 31 से 40 वर्ष के बीच थी।

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हत्या का समय शाम छह से रात 12 बजे के बीच का था। जिन शवों पर शोध हुआ उनमें 78.66 फीसदी विवाहित थे। इनमें पांच वर्ष की एक बच्ची व 70 वर्ष के बुजुर्ग को शामिल किया गया था। शोध में यह भी पता चला कि शहरों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र में हत्याएं अधिक होती हैं। वहीं, अधिकांश हत्या घर की छत, बगीचे और सड़क पर हुई। जबकि छात्रावास और जेल में सबसे कम मौतें हुई हैं।



 

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1- कुल 150 मामलों में 78.66 फीसदी पुरुष और 23.33 फीसदी महिलाएं शामिल थीं।

2- ग्रामीण क्षेत्रों में 76 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 24 फीसदी हत्या के मामले सामने आए।

3- इनमें 89.33 फीसदी हिंदू व आठ फीसदी मुस्लिम समुदाय से थे। अन्य धर्मों के 0.6 फीसदी और दो फीसदी मामलों में धर्म की जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी।

4- हत्याओं की 33.33 फीसदी घटनाएं घर-छत, बगीचे और 28 फीसदी सड़क पर हुईं। वहीं, छात्रावास व जेल में .6 फीसदी हत्या हुई।

5-मजदूर वर्ग 34 फीसदी, किसान 16 फीसदी, स्व-नियोजित 14 फीसदी, छात्र 10 फीसदी, बेरोजगार आठ फीसदी और सेवा क्षेत्र में कार्यरत 1.3 फीसदी लोग प्रभावित पाए गए।

6-इनमें 39.33 फीसदी अशिक्षित और 27.33 फीसदी प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर चुके थे।

7- इनमें 34 फीसदी निम्न व 10.66 फीसदी उच्च वर्ग के थे।

9-हत्या में कठोर और कुंद वस्तु का इस्तेमाल 62.66 फीसदी रहा। धारदार और भारी हथियार का प्रयोग 15.33 फीसदी किया गया।

10-64 फीसदी मामलों में सिर पर घाव (लैसरेशन), 24 फीसदी में खरोंचदार चोट और 16.66 फीसदी मामलों में सिर की हड्डी टूटने से मौत हुई। 11-फ्रैक्चर वाले मामलों में अधिकतर लीनियर आठ फीसदी और डिप्रेस्ड फ्रैक्चर 5.3 फीसदी रहा।

12-सबसे अधिक फ्रैक्चर माथे की हड्डी 4.66 फीसदी और कनपटी की हड्डी 3.33 फीसदी पाई गई।

13-आंतरिक रक्तस्राव के मामलों में अधिकतर एक्सट्राड्यूरल रक्तस्राव 6.67 फीसदी दर्ज किया गया।

यह अध्ययन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हत्याओं में सिर पर लगने वाली चोटों के स्वरूप, कारणों और प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालता है। इस शोध से प्राप्त निष्कर्ष अपराध नियंत्रण और फॉरेंसिक जांच को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकते हैं। -डॉ. अर्चना कौल, विभागाध्यक्ष, फॉरेंसिक विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।

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