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निर्मल खत्री सहित आठ कांग्रेसियों ने किया सरेंडर, जमानत मंजूर

Wed, 20 Mar 2019 12:45 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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 स्पेशल कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद मंगलवार को निर्मल खत्री सहित आठ कांग्रेसी नेताओं ने सरेंडर कर दिया। उनके जमानत प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी की जमानतें मंजूर कर ली हैं। कांग्रेसी नेताओं पर लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान विधान सभा घेरने से रोकने पर पथराव और कानून का उल्लंघन करने का मुकदमा दर्ज है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद सभी को अंतरिम जमानत पर रिहा किया है। नियमित जमानत पर सुनवाई पांच अप्रैल 2019 को होगी। गैर हाजिर रहने पर कोर्ट ने सभी लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था।यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने एडीजीसी राजेश गुप्ता एसपीओ राधाकृष्ण मिश्र और बचाव पक्ष के अधिवक्ता शीतला प्रसाद मिश्र, उमाशंकर तिवारी और कौशलेश सिंह को सुनकर दिया है।

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घटना 17 अगस्त 2015 की लखनऊ के हजरतगंज थाने की है। चौकी प्रभारी प्यारे लाल प्रजापति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि महंगाई, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, भ्रष्टाचार आदि मुद्दों को लेकर कांग्रेस पार्टी का धरना प्रदर्शन चल रहा था। इसके विधानसभा घेरने का प्रयास किया गया। पुलिस ने रोका तो लोगों ने पथराव कर दिया। इसमें कई पुलिस अधिकारियों को गंभीर चोटें आईं। प्रकरण की पत्रावली अंतरित होकर सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट आई है। सरेंडर करने वाले नेताओं में निर्मल खत्री, मधुसूदन मिस्त्री, ओंकार नाथ सिंह, प्रदीप माथुर, बोध लाल शुक्ल, केके शर्मा, रमेश मिश्रा और पूर्व मंत्री प्रदीप आदित्य जैन ने शामिल रहे। इसी प्रकरण में शनिवार को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर को कोर्ट ने अंतरिम जमानत पर रिहा किया था।

आचार संहिता उल्लंघन में नन्दी दोषमुक्त
प्रयागराज। आचार संहिता उल्लंघन के एक मामले में सरकार द्वारा मुकदमा वापस लेने पर  स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए ने मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी को  दोषमुक्त कर दिया है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने विशेष अधिवक्ता गोपाल सिंह और एडीजीसी राजेश गुप्ता को सुनकर दिया है।
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घटना 25 मार्च 2014 की कोतवाली थाने की है। कांग्रेस प्रत्याशी नन्दगोपाल गुप्ता नन्दी पर आरोप है कि बिना अनुमति के जुलूस निकाल कर आचार संहिता का उल्लंघन किया था। शासन के अनुसचिव ने 24 अक्तूबर 2018 को पत्र लिख कर डीएम को मुकदमा वापसी की कार्यवाही का निर्देश दिया था। जिस पर अभियोजन की ओर से स्पेशल कोर्ट में छह दिसंबर को अर्जी दी गई थी। अभियोजन का तर्क है कि घटना से कोई क्षति नहीं हुई है। अपराध साधारण प्रकृति का है। इसे परिवाद के रूप में दाखिल किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस अपराध से नन्दगोपाल गुप्ता नन्दी को उन्मोचित कर दिया।

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