हरिसेनगंज- मऊआइमा मवेशी मंडी में कुर्बानी के लिए बकरों की खरीदारी करते लोग
इस्लाम के दो सबसे बड़े त्योहारों में एक ईद-उल-अजहा बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। ईद-उल-फितर के ठीक 2 महीने 10 दिन बाद जिलहिज्जा महीने की 10 तारीख को मनाए जाने वाला यह पर्व त्याग और बलिदान का संदेश देता है। इस मौके पर मुसलमान तीन दिन तक कुर्बानी करते हैं।
मुफ्ती फजलुर्रहमान कासमी ने बताया कि हदीस के मुताबिक, हर आकिल-बालिग मुस्लिम मर्द और औरत जिसके पास साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े सात तोला सोना अथवा इसके बराबर नकद रकम हो और वह बुनियादी जरूरतों से छुटकारे के बाद कर्जदार न हो, उस पर कुर्बानी फर्ज है।
मौलाना वसीम मजाहिरी ने बताया कि कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं। एक हिस्सा गरीबों-मिस्कीनों, दूसरा रिश्तेदारों-पड़ोसियों और तीसरा हिस्सा अपने घर वालों के लिए रखा जाता है। ईद-उल-अजहा को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई है। बकरा मंडी में खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है।