साक्ष्यों की प्रमाणिकता की भी हो सकेगी जांच
इस एप के जरिए जुटाए गए सबूतों की प्रमाणिकता की भी जांच हो सकेगी। दरअसल एप के जरिए जो साक्ष्य एकत्रित किए जाएंगे, उनकी जियोटैगिंग भी होगी। यानी कि साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित किए जा रहे फोटो, वीडियो,एसएमएस आदि भौगोलिक डाटा जैसे अक्षांश व देशांतर आदि के साथ अपलोड किए जा सकेंगे। इससे जरूरत पड़ने पर साक्ष्यों की प्रमाणिकता की भी जांच की जा सकेगी। पुलिस अफसरों का कहना है कि यह मुकदमे की प्रभावी पैरवी में भी मददगार साबित होगा।
बाद में भी अपलोड कर सकते हैं साक्ष्य
पुलिस अफसरों ने बताया कि ई साक्ष्य एप के तहत हर विवेचक की अपनी लाॅगिन आईडी होगी। लाॅगिन करने के बाद वह मुकदमा अपराध संख्या दर्ज करेंगे और इसके बाद मुकदमे से संबंधित अन्य भौतिक साक्ष्यों को डिजिटल रूप में सुरक्षित कर सकेंगे। एप में विवेचना के दौरान बाद में सामने आने वाले साक्ष्यों को भी सुरक्षित रखने की भी सुविधा मिलेगी।