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खुलासा : क्रिप्टो करेंसी से मनी लॉन्ड्रिंग में डमी खातों का भी इस्तेमाल, जाली आधार पर खुलवाए जाते थे खाते

Tue, 03 Jan 2023 04:04 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जाली आधार कार्ड कहां और कैसे बनाए जाते थे, पुलिस इसका पता लगाने में भी जुटी हुई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जेल भेजे जाने से पहले पूछताछ में आरोपी ने कई अहम बातों का खुलासा किया। बताया कि ब्लैक मनी को व्हाइट में तब्दील करने के इस खेल के लिए डमी बैंक खाते भी खुलवाए जाते हैं।
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क्रिप्टो करेंसी(सांकेतिक) - फोटो : istock
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विस्तार
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क्रिप्टोकरेंसी के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग के खेल में डमी बैंक खातों का भी इस्तेमाल होता था। यह खाते जाली आधार कार्ड के जरिये खुलवाए जाते थे। यह जाली आधार कार्ड कृष्णा अवतार सिंह खुद बनवाता था। जाली आधार कार्ड कहां और कैसे बनाए जाते थे, पुलिस इसका पता लगाने में भी जुटी हुई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जेल भेजे जाने से पहले पूछताछ में आरोपी ने कई अहम बातों का खुलासा किया। बताया कि ब्लैक मनी को व्हाइट में तब्दील करने के इस खेल के लिए डमी बैंक खाते भी खुलवाए जाते हैं। यह खाते जिन दस्तावेजों पर खुलवाए जाते थे, वह पूरी तरह से जाली होते हैं। 

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इसमें सबसे मुख्य आधार कार्ड है। फोटो मिक्सिंग सॉफ्टवेयर के जरिये यह जाली आधार कार्ड बनाए जाते हैं। इसमें नाम-पता वही रहता है जबकि फोटो संबंधित का लगा दिया जाता है। जाली दस्तावेजों पर खुले बैंक खातों के इस्तेमाल पुलिस से बचने के लिए किया जाता है। 

पुलिस अफसरों ने बताया कि अचानक किसी खाते में ज्यादा लेनदेन होने पर वह बैंक के रडार पर आ जाता है। इस संबंध में बैंक खाताधारक को बुलाकर पूछताछ करती है और मामला संदिग्ध होने पर पुलिस को सूचना दी जाती है। अफसर बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में बैंकों की ओर से इसका पालन नहीं किया जाता। दूसरी बात यह कि अगर सूचना दी भी गई तो फर्जी केवाईसी होने के चलते खाताधारक तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। 

जीशान खान के नाम से बनवाया था आधार कार्ड 
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी कृष्णा अवतार के कब्जे से भी एक जाली आधार कार्ड बरामद हुआ है। इसमें फोटो तो उसकी लगी है, लेकिन नाम जीशाना खान पुत्र शमीमउद्दीन निवासी पूरी मदानी, हेना गोल्ड बेकरी, बाजूपुर जीटीबी नगर लिखा हुआ है। पुलिस के पूछने पर उसने बताया कि जाली आधार कार्ड उसने खुद बनवाया है। उसने यह भी बताया कि डमी खाते खुलवाने के साथ ही वह इस जाली आईडी का इस्तेमाल होटलों आदि में ठहरने के लिए करता था। ताकि वह पुलिस की पकड़ में न आ सके। 

बाइनेंस पर वालेट भी फर्जी केवाईसी पर
इस खेल में फर्जीवाड़ा सिर्फ खाते खोलने तक ही सीमित नहीं था। इसमें शामिल लोग कदम-कदम पर जालसाजी करते हैं। पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि क्रिप्टोकरेंसी टीथर खरीदने के लिए बाइनेंस एप पर जो वालेट बनाया गया, उसके लिए भी फर्जी केवाईसी का इस्तेमाल किया गया। इसमें किसी सुरेश कुमार के नाम का आईडी प्रूफ था। पूछताछ में खुद आरोपी ने यह कबूल किया कि उसने ही जाली आईडी प्रूफ बनाकर वालेट का डिटेल जय को भेजा था।

एसटीएफ संग एटीएस ने की पूछताछ, ईडी भी करेगी जांच
गेमिंग वेबसाइट्स से होने वाली अवैध कमाई को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर दुबई भेजने के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स के साथ ही एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड ने भी जांच पड़ताल की है। दोनों टीमों ने जेल भेजे जाने से पहले आरोपी से लंबी पूछताछ की। उधर, पुलिस की ओर से इस मामले की सूचना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी दे दी गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही ईडी की ओर से भी जांच पड़ताल की जाएगी। 

सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी कृष्णा अवतार सिंह ने क्रिप्टोरकरेंसी के रूप में रुपये दुबई भेजने की बात बताई तो अफसरों के कान खड़े हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने इसकी सूचना एसटीएफ के साथ ही एटीएस को भी दी। 

इसके बाद एसटीएफ व एटीएस की टीमें क्राइम ब्रांच दफ्तर पहुंचीं और आरोपी से घंटों पूछताछ की। उसके लिंक जानने की कोशिश की और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जानकारी ली। गहनता से पूछताछ करने के बाद दोनों टीमें वापस चली गईं। उधर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला होने के नाते सूचना प्रवर्तन निदेशालय की स्थानीय इकाई को भी दी गई। माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही ईडी भी जांच पड़ताल शुरू कर सकती है। 
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एफएसएल भेजा गया मैकबुक व मोबाइल
आरोपी के कब्जे से बरामद मैकबुक व पांच मोबाइल फोन सोमवार को जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी भेज दिए गए। पुलिस सूत्रों का कहना है कि फिलहाल उन्हें सिर्फ 20 खातों से हुए पिछले 10 दिनों के लेनदेन का ब्यौरा मिला है। जबकि आरोपी ने पूछताछ में यह बात कबूली है कि वह पिछले छह महीनों से इस काम में लगा हुआ था। ऐसे में मैकबुक और मोबाइल से अहम जानकारी मिल सकती है। एफएसएल की टीम मैकबुक व मोबाइल में उपलब्ध जानकारियों के साथ ही डिलीट किए गए डाटा को भी रिकवर कर सकती है। 

कस्टडी रिमांड के लिए दी जाएगी अर्जी
पुलिस आरोपी को कस्टडी रिमांड पर लेने की भी तैयारी में है। दरअसल अभी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। मसलन जय के बारे में अभी तक आरोपी ने कोई जानकारी नहीं दी है। फेसबुक व टेलीग्राम पर बने चैट ग्रुप्स, जिनमें अकाउंट खरीदने व बेचने का काम होता था, उसके संचालकों के बारे में भी कुछ पता नहीं चल सका है। ऐसे कई सवाल अभी बाकी हैं। एडीसीपी क्राइम सतीशचंद ने बताया कि आरोपी को कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए जल्द ही कोर्ट में अर्जी दी जाएगी। 
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