उच्च शिक्षा निदेशालय को लखनऊ शिफ्ट किए जाने के मुद्दे पर राजनीति गरमाती जा रही है। हालांकि, डिप्टी सीएम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निदेशालय प्रयागराज में ही रहेगा और निदेशालय शिफ्ट किए जाने का आदेश देने वाले अफसर के खिलाफ जांच होगी।
उच्च शिक्षा निदेशालय को लखनऊ शिफ्ट किए जाने के मुद्दे पर राजनीति गरमाती जा रही है। हालांकि, डिप्टी सीएम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निदेशालय प्रयागराज में ही रहेगा और निदेशालय शिफ्ट किए जाने का आदेश देने वाले अफसर के खिलाफ जांच होगी। इसके बावजूद असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विपक्षी दल के लोग चाहते हैं कि 30 दिसंबर को जारी आदेश निरस्त किया जाए।
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डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य आठ जनवरी को प्रयागराज में होंगे। शिक्षा निदेशालय कर्मचारी मिनिस्टीरियल संघ, उत्तर प्रदेश के मंत्री प्रदीप कुमार सिंह के अनुसार डिप्टी सीएम ने रविवार को सुबह 11 बजे सर्किट हाउस में संघ के प्रतिनिधिमंडल से मिलने का वक्त दिया है। डिप्टी सीएम से मुलाकात के बाद ही तय होगा कि आंदोलन को आगे बढ़ाना है या नहीं। हालांकि, कर्मचारी भी असमंजस में हैं कि अगर आदेश निरस्त नहीं हुआ तो भविष्य में निदेशालय को किसी भी दिन लखनऊ शिफ्ट किया जा सकता है।
वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को ‘अमर उजाला’ से कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार के जो भी कार्यालय प्रयागराज में हैं, वह यहीं रहेंगे। उधर, दो दिनी कलमबंद हड़ताल के बाद शनिवार को अवकाश वाले दिन संघ के प्रतिनिधियों ने सपा विधायक विजमा यादव, सपा एमएलसी डॉ. मान सिंह यादव, अपना दल एस के विधायक वाचस्पति, पूर्व सांसद नागेंद्र सिंह पटेल आदि से मिलकर समर्थन मांगा।
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तीनों ही विधायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कहा कि निदेशालय प्रयागराज का गौरव है। ऐसे में किसी भी सूरत में निदेशालय को प्रयागराज से स्थानांतरित न किया जाए। सपा विधायकों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि निदेशालय को लखनऊ शिफ्ट किए जाने से संबंधित शासनादेश को तत्काल निरस्त किया जाए।