अचानक बढ़ते तापमान ने गेहूं उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी के शुरुआती दिनों में ही पारा सामान्य से ऊपर पहुंचने लगा है, जिससे खेतों में मौजूद नमी कम हो रही है। इसका सीधा असर गेहूं के पौधों और बालियों के विकास पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
किसानों का कहना है कि इस समय फसल को ठंडे मौसम और पर्याप्त नमी की जरूरत होती है, लेकिन तेज धूप और दिन में चल रही पछुआ हवा खेतों को जल्दी सुखा रही है। इससे पौधों की जड़ों तक नमी नहीं पहुंच पा रही और फसल कमजोर पड़ने लगी है।
मलाक बलऊ गांव के प्रधान व किसान संदीप पटेल व सम्हई के किसान अजय शुक्ल ने बताया कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा और समय पर सिंचाई नहीं की गई, तो उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पछुआ हवा के कारण मिट्टी की ऊपरी सतह से नमी तेजी से उड़ रही है, जिससे दाने बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
किसान कल्याण केंद्र शृंग्वेरपुर धाम के प्रभारी संदीप पटेल ने बताया कि किसान खेतों में नमी बनाए रखने के लिए हल्की सिंचाई करें और जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का छिड़काव करें। साथ ही मौसम पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। किसानों को डर है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो इस बार गेहूं की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा।