अब किसी जीव पर दवा के ट्रायल का साइड इफेक्ट नहीं होगा। शुरुआती चरणों में दवा का परीक्षण सीधे जीव पर नहीं बल्कि अलग से उसकी कोशिका पर किया जाएगा। मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के विज्ञानी इसके लिए सेंसर आधारित उपकरण तैयार कर रहे हैं।
अब किसी जीव पर दवा के ट्रायल का साइड इफेक्ट नहीं होगा। शुरुआती चरणों में दवा का परीक्षण सीधे जीव पर नहीं बल्कि अलग से उसकी कोशिका पर किया जाएगा। मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के विज्ञानी इसके लिए सेंसर आधारित उपकरण तैयार कर रहे हैं। इस उपकरण के जरिये प्रारंभिक चरण में दवा का ट्रायल किसी जानवर या मनुष्य के शरीर पर सीधे करने के बजाय जंतु कोशिका को अलग करते हुए सिर्फ कोशिका पर किया जाएगा।
विज्ञापन
एमएनएनआईटी के एप्लाइड मैकेनिक्स विभाग के वैज्ञानिक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. युवनेश काशीविश्वनाथन को प्रारंभिक चरण में सफलता मिलने के बाद राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) से 69.72 लाख रुपये का अनुदान मिला है। डॉ. युवनेश बताते हैं कि अगले चरण में एक डिवाइस तैयार की जाएगी, जिसकी मदद से विज्ञानी किसी भी दवा का ट्रायल सीधे जीव की कोशिका पर कर सकेंगे। अगर कोई साइड इफेक्ट होता है तो जीव को सीधे कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा और सुधार के बाद किसी दूसरी कोशिका पर ट्रायल को आगे बढ़ाया जा सकेगा। शुरुआती चरणों के ट्रायल पूरा होने के बाद अंतिम परीक्षण किसी जीव पर किया जाएगा।
कम समय में पूरा हो सकेगा दवा का परीक्षण
सेंसर आधारित उपकरण से परीक्षण की प्रक्रिया बहुत ही कम समय में पूरी की जा सकेगी। दवा के ट्रायल के लिए किसी जानवर लैब में बड़ा करने आदि में लगने वाले समय की बचत होगी। इससे दवा जल्द तैयार की जा सकेगी। यही प्रक्रिया मानव पर ट्रायल के दौरान भी अपनाई जाएगी।
विज्ञापन
कैंसर की दवा बनाने में भी सहायक होगा उपकरण
इस उपकरण से कैंसर की दवा बनाने और उसके परीक्षण में भी मदद मिलेगी। डॉ. युवनेश ने बताया कि उपकरण से शरीर के किसी भी एक विशेष अंग पर भी दवा का प्रयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही कैंसर के सेल को इस उपकरण में रखकर उसके बढ़ने की गति और उसपर कौन सी दवा कितनी कारगर हो रही है और कौन सी दवा कारगर नहीं हो रही है, इसका परीक्षण किया जा सकेगा।