तीन तरीकों की तुलना
शोध में तीन उपचार अपनाए गए। पहले में पारंपरिक बाढ़ सिंचाई और 250 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर, दूसरे में ड्रोन आधारित सेंसर-निर्देशित फर्टिगेशन और तीसरे में समुद्री शैवाल आधारित जैवउत्तेजक का उपयोग किया गया।
पानी और खाद की बड़ी बचत
प्राप्त डेटा के अनुसार, सेंसर-आधारित उपचार में सिंचाई जल की खपत 8,900 से घटकर 6,200 घनमीटर प्रति हेक्टेयर (करीब 30 प्रतिशत बचत) रह गई। नाइट्रोजन की मात्रा 250 से घटकर 190 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (लगभग 24 प्रतिशत कमी) हो गई। इससे नाइट्रोजन उपयोग दक्षता (एनयूई) 31 से बढ़कर 48 फीसदी हो गई। वहीं ड्रोन निगरानी से पता चला कि खेत के 70 फीसदी हिस्से में कम नाइट्रोजन की आवश्यकता थी।
उपज और मुनाफे में जबरदस्त बढ़ोतरी
पहले गन्ने की पैदावार 78.2 टन प्रति हेक्टेयर थी। ड्रोन और खास खादों के इस्तेमाल से यह 16.8 प्रतिशत बढ़कर 91.3 टन हो गई। इससे किसानों का मुनाफा भी 52,000 से बढ़कर 81,200 रुपये प्रति हेक्टेयर हो गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक खेती में कम लागत में अधिक मुनाफा देने का जरिया बन सकती है।