नार्थ टेक सिंपोजियम में एक ऐसा अत्याधुनिक ड्रोन आकर्षण का केंद्र बना, जिसने पारंपरिक मल्टी-रोटर ड्रोन को चुनौती दी। हेलिकॉप्टर आधारित डिजाइन पर तैयार यह ड्रोन वैरिएबल पिच तकनीक से लैस है, जो इसे ऊंचाई पर भी बेहतर दक्षता देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य ड्रोन में ब्लेड का एंगल (एंगल ऑफ अटैक) स्थिर रहता है जिससे अधिक ऊंचाई पर उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इस ड्रोन में ब्लेड का एंगल जरूरत के अनुसार बदलता रहता है जिससे यह कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।
तकनीकी क्षमताओं की बात करें तो यह ड्रोन औसत समुद्र तल से 5000 मीटर की ऊंचाई से लॉन्च किया जा सकता है और 500 मीटर तक ऑपरेट कर सकता है। इसकी 50 किलोग्राम तक की पेलोड उठाने की क्षमता है। यही नहीं, इसमें पेलोड ड्राॅप मैकेनिज्म भी दिया गया है, जिससे बिना लैंड किए जरूरी सामग्री को निर्धारित स्थान पर गिराया जा सकता है।
किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में इसमें लगा पैराशूट खुद ही खुल जाता है, जिससे ड्रोन सुरक्षित रूप से जमीन पर उतर सके। हालांकि अभी इसे भारतीय सेना में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन डेवलपर्स के अनुसार 10,000 फीट की ऊंचाई पर इसका सफल परीक्षण हो चुका है।
सेंट्रल कमांड के साथ इसका डेमो भी किया जा चुका है और आने वाले महीनों में इसकी मांग सामने आने की संभावना है। इसका उपयोग लॉजिस्टिक, निगरानी और आपातकालीन सप्लाई जैसे कार्यों में हो सकता है।