समयांतर संस्था की ओर से रविवार को सांस्कृतिक केंद्र में ‘जाति ही पूछे साधु की’ नाटक का मंचन किया गया। विजय तेंदुलकर लिखित और राकेश वर्मा के निर्देशन में शिक्षा प्रणाली, शिक्षक और शिक्षार्थी पर तंज कसा गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को नाटक के अंत तक बाधा रखा। नाटक में महीपत नाम के युवक तृतीय श्रेणी में एमए पास करके भी बेरोजगार है। शिक्षा सामग्रियों को बेचकर वह नौकरी की अर्जियां भेजता रहता है। एक ग्रामीण कालेज से उसे नियुक्ति का पत्र आता है। महीपत जब वहां पहुंचता है तो वहां की शिक्षा व्यवस्था को देखकर वह परेशान हो जाता है।
वहां की व्यवस्था के अनुरूप उसे ढलना पड़ता है। एक सिफारिशी लेक्चरार नलनी की नियुक्ति महीपत के अधीन होती है। नलनी कालेज के चेयरमैन की रिश्तेदार है। दोनों एक दूसरों को प्यार करने लगते हैं, परंतु चेयरमैन को पता चलने पर महीपत को नौकरी से निकाल दिया जाता है। वह अपनी पुरानी जिंदगी में वापस लौट आता है। नाटक में संदीप यादव, आकाश अग्रवाल, सत्यम उपाध्याय, रुचि गुप्ता, श्वेतांक मिश्रा, कृष्ण राज यादव, इंद्रजीत सिंह यादव, हर्ष श्रीवास्तव आदि ने अभिनय किया। सहायक निर्देशन कृष्ण राज यादव, परिकल्पना संदीप यादव और मंच प्रबंधक रवि शाह, कमल मिश्रा का रहा।