संस्था आकार की ओर से नाटक ‘हट्टमाला के उस पार’ का मंचन
प्रयागराज। संस्था आकार की ओर से मंगलवार को सांस्कृतिक केन्द्र प्रेक्षागृह में नाटक ‘हट्टमाला के उस पार’ का मंचन किया गया । दरअसल हट्टमाला एक ऐसी दुनिया की कल्पना है जहां सोना जैसी अति मूल्यवान चीजें हट्टमाला के उस पार अजायबघर में रखी शोध की वस्तु है। यहां सभी अपनी क्षमताओं से काम करते हुए समाज के लिए जरूरी साधनों का निर्माण करते हैं। तैयार चीजों का जरूरत के मुताबिक उपभोग किया जाता है।
यहां धन और निजी संपत्ति की अवधारणा नहीं बल्कि एक दूसरे की क्षमताओं पर विश्वास और सौहार्द ही यहां की पूंजी है। इसीलिए यहां दरवाजों पर ताले नहीं हैं। इस दुनिया में परेशानी तब पैदा होती है,जब दो चोर केनाराम और बेचाराम एक रात चोरी की नीयत से आते है । लेकिन, वहां के लोगो की नेकनीयत और भलमनसाहत उनका मन बादल देती है और वे भी सीधे तथा शरीफ बन जाते हैं।
सिंगापुर में नाटक की पढ़ाई कर रहे रंगकर्मी संदीप यादव की परिकल्पना एवं निर्देशन में तैयार नाटक में इंडोनेशिया की पपेट शैली वयांग कुलित, नृत्य शैली वांग वयांग का प्रयोग किया गया। बादल सरकार की मूलत: बांग्ला रचना का हिन्दी अनुवाद अभिषेक गोस्वामी ने किया जबकि रंगमंच के शोधार्थी नीरज उपाध्याय ने इसे प्रस्तुति के योग्य बनाया। प्रस्तुति में सतीश तिवारी, सुनीता थापा, कौशलेन्द्र, नयनिका, शिवम, शुभम, अमित, प्रज्ञा, आलोक, सत्यम, नवीन, जतिन, ललित ने अपनी-अपनी भूमिकाओं से न्याय करते हुए प्रस्तुति को प्रभावी बनाया।
डिजिटल रूप में ब्रोशर
संस्था आकार ने नाट्य जगत में पहली बार प्रयोग करते हुए दर्शकों को डिजिटल यूआर कोड से स्कैन कराके ब्रोशर उपलब्ध कराया। नाटक के ब्रोशर का डिजिटल यूआर कोड बनाकर प्रेक्षागृह के बाहर लगा दिया गया था, जिसे मोबाइल से स्कैन करके नाटक व कलाकारों की पूरी जानकारी ली जा सकती थी। पर्यावरण संरक्षण और कागज बचाना इसका मुख्य मकसद रहा।