खड़गपुर के आईआईटियन हैं डॉ. रोशन
डॉ. रोशन होता ने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया और यहीं से एमटेक और पीएचडी भी। इसके बाद वह बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स स्थित व्राई यूनिवर्सिटी में पहुंच गए। यहां बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर पुर्जों की अच्छी पकड़ पर काम शुरू किया। यहीं पर विशिष्ट अंगुलियां बनाने में कामयाबी पाई। चीन और बेल्जियम के शोधकर्ताओं संग हुआ यह शोध स्विट्जरलैंड से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय जर्नल रोबोटिक के मई अंक में प्रकाशित हो चुका है।
कैड मॉडल से निकाली अच्छी पकड़ वाली लोकेशन
डॉ. रोशन बताते हैं कि किसी भी वस्तु का पहले कैड मॉडल (कंप्यूटर की सहायता से डिजाइन) बनाया जाता है। कैड मॉडल से डाटा निकालना बेहद कठिन है। सो, पहले एक प्वाइंट क्लाउड बनाते हैं। इसकी गणना करके नॉर्मल्स निकालते हैं। यही नार्मल्स सॉफ्टवेयर में फीड किए जाते हैं। फिर, अच्छी पकड़ वाली जगहें पता की गईं। अंगुलियों को थ्रीडी प्रिंटिंग से तैयार करके रोबोट के सॉफ्टवेयर में इन्हीं गणनाओं को फीड कर दिया गया। अब समझदार बन चुका रोबोट जान सकता है कि उसे सामान को किस कोण से पकड़ना है ताकि कोई नुकसान न हो।
बॉयो प्लास्टिक और मक्के के स्टार्च से बनाईं अंगुलियां
रोबोट की अंगुलियां पॉलीलैक्टिक एसिड मैटीरियल से बनाई गई हैं। इनमें बॉयो प्लास्टिक है और मक्के के स्टार्च भी। पकड़ मजबूत रहे, इसके लिए एक अंगुली में एक तो दूसरी में दो संपर्क स्थान (कॉन्टैक्ट लोकेशन) स्थान दिए गए हैं।
रोबोटिक्स के क्षेत्र में डॉ. रोशन होता का योगदान काबिलेतारीफ है। उनकी बनाई अंगुलियों से रोबोटिक्स की दुनिया में नए आयाम स्थापित होंगे। - प्रो. मुकुल शुक्ला, विभागाध्यक्ष, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, एमएनएनआईटी