फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रयागराज नगर निगम : मेयर रहते डॉ.रीता जोशी ने सुभाष चौराहे पर चलाया था मिनी सदन

Mon, 12 Dec 2022 12:03 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद की सांसद डॉ.रीता बहुगुणा जोशी बताती हैं. 1996 में वह महापौर थी। लेकिन तत्कालीन सरकार नगर निगम के सदन से पारित प्रस्तावों का संज्ञान नहीं लेती थी। तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी ( वर्तमान में नगर आयुक्त)  पद भी सदन से पास हुए किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते थे।
विज्ञापन
prayagraj news : Reeta josh - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नगर निगम प्रयागराज का अतीत कई तरह के उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। शायद ही कोई ऐसा मिनी सदन रहा हो, जिसकी बैठक विरोध दर्ज कराने के लिए सड़क पर हुई हो। प्रयागराज नगर निगम की महापौर और पार्षदों ने तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी हिमांशु कुमार की मनमानी से परेशान होकर सुभाष चौराहे पर सदन की बैठक बुला ली थी। नगर निगम के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था। 

विज्ञापन



इलाहाबाद की सांसद डॉ.रीता बहुगुणा जोशी बताती हैं. 1996 में वह महापौर थी। लेकिन तत्कालीन सरकार नगर निगम के सदन से पारित प्रस्तावों का संज्ञान नहीं लेती थी। तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी ( वर्तमान में नगर आयुक्त)  पद भी सदन से पास हुए किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते थे। जनता से जुड़े मामलों की अनदेखी और विकास के लिए सदन में पारित हुए प्रस्ताव को नहीं मानने के कारण पार्षदा और महापौर दोनों में नाराजगी थी। 

विज्ञापन

एक बार तो सदन की कार्यवाई के दौरान मुख्य नगर अधिकारी ने अपने अफसरों के साथ वाकआउट कर दिया। ऐसे में महापौर ने आनन-फानन में फैसला लेते हुए सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे पर सदन की बैठक बुलाने का निर्णय लिया। सांसद डॉ.रीता जोशी बताती हैं कि वह ऐतिहासिक पल था। इसमें सदन के सभी पार्षदों ने पूरा साथ दिया। निगम से निकलकर सभी सुभाष चौराहे पर पहुंचे और वहीं बैठकर सदन की कार्यवाही शुरू कर दी। सड़क पर पार्षदों ने मुख्य नगर अधिकारी की मनमानी के खिलाफ जमकर भाषण दिया और नारेबाजी की। 


इस दौरान तत्कालीन महापौर डॉ.रीता जोशी ने भी मुख्य विकास अधिकारी की मनमानी और सदन की लगातार अनदेखी करने पर अपने विचार रखे। नगर निगम प्रयागराज के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था। महापौर और पार्षदों की ओर से विरोध रूवरूप उठाए गए इस कदम की चर्चा लखनऊ तक पहुंची। इसके बाद मुख्य नगर अधिकारी ने अपनी गलती मानी और सदन से पास प्रस्तावों की अनदेखी बंद की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें