नगर निगम प्रयागराज का अतीत कई तरह के उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। शायद ही कोई ऐसा मिनी सदन रहा हो, जिसकी बैठक विरोध दर्ज कराने के लिए सड़क पर हुई हो। प्रयागराज नगर निगम की महापौर और पार्षदों ने तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी हिमांशु कुमार की मनमानी से परेशान होकर सुभाष चौराहे पर सदन की बैठक बुला ली थी। नगर निगम के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था।
इलाहाबाद की सांसद डॉ.रीता बहुगुणा जोशी बताती हैं. 1996 में वह महापौर थी। लेकिन तत्कालीन सरकार नगर निगम के सदन से पारित प्रस्तावों का संज्ञान नहीं लेती थी। तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी ( वर्तमान में नगर आयुक्त) पद भी सदन से पास हुए किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते थे। जनता से जुड़े मामलों की अनदेखी और विकास के लिए सदन में पारित हुए प्रस्ताव को नहीं मानने के कारण पार्षदा और महापौर दोनों में नाराजगी थी।